सरल वास्तु – अद्वितीय और वैज्ञानिक वास्तु समाधान

व्यक्ति के घर, कार्यस्थल और जन्म की तारीख के आधार पर

विना संरचनात्मक परिवर्तन समय और पैसे की बचत

निश्चित परिणाम पाइये 7 – 180 दिनों के भीतर

निजीकृत वास्तु जन्म तिथि के आधार पर

खुद के या किराए के घर के योग्य

डॉ. चंद्रशेखर गुरूजी

प्रख्यात वास्तु विशेषज्ञ! हमारे संस्थापक, उपदेशक, दूरदर्शी और जनहितैषी

मानव जातिको सामना करनेवाली चुनौतियों के विषय में गुरूजी को बचपनसेही हमेशासे कुतूहल था और पीड़ा भी होती थी । जब वे 8 साल के थे तब उन्होंने निःस्वार्थ वृत्ती से पुराने मंदिरों के पुनरूज्जीवन के लिए लोगों से दान इकठ्ठा करना सुनिश्चित किया था । मंदिर एक सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर जगह थी और जिससे आसपास के लोगों के लिए प्रसन्नता की प्राप्ती होती थी । पुराने मंदिरों के पुनरूज्जीवन का यही उद्देश्य था कि लोगों के जीवन में खुशियों को वापस लाया जाए ।

  • स्थापत्य अभियांत्रिकी के विद्वान तथा ब्रम्हांडीय वास्तुविद्या विद्यापीठ से सर्वोच्च (डॉक्टरेट) पदवी प्राप्त ।
  • जीवन से संबंधित समस्याओं को सुलझाने के लिए 2000 से ज्यादा परिसंवादों का आयोजन |
  • 16 प्रतिष्ठीत राष्ट्रीय और आंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित
  • जनहितैषी

प्रशंसापत्र

देखिये हमारे खुश लाभार्थि हमारे बारे मैं क्या कहते है

श्रीमान आश्विन गुप्ता मध्यप्रदेश मैं रहने वाले सरकारी दफ्तर मैं नोकरी करनेवाले व्यक्ति है। इंसान की तर्रकी जो कारोबार मैं वो काम करता हो उसमे मुनाफा हो तो होती है, या जो नोकरी करता हो उसमे प्रमोशन हो तो। आश्विन गुप्ता पिछले १० सालो से जी जान से मेहनत करके अपने दफ्तर मैं काम कर रहे थे लेकिन उन्हें कोई जॉब प्रमोशन नहीं मिल रहा था। प्रमोशन ना होने से एक अनिश्चित का वातावरण बना रहता था और अश्विन हताश बने जा रहे थे। जिससे आर्थिक प्रश्न उद्भवित हो रहे थे।
सरल वास्तु के अवलंबन के बाद आश्विनजी को पता चला की इंसान के हर समस्या का हल उनके घर या कार्यस्थल मैं होता है। अगर घर के लक्ष्मी स्थान पर शौचालय/स्नानगृह हो तो घर मैं नकारात्मकता बढ़ती है। बिना किसी तोड़फोड़ के सरल वास्तु सलाहकारो ने अश्विनजी को कुछ वास्तु उपाय बताये जिससे अश्विनजी के ७ चक्र संतुलित हुए।

सरल वास्तु ब्लॉग

वास्तु टिप्स और दैनिक जीवन में उपयोगी लेख

१३. उत्तरी-पूर्व दिशा का वैज्ञानिक विश्लेषण

भारतीय प्राचीन ग्रंथ वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि हम घर को बनवाते समय या उसमे सामान व्यवस्थित करते समय यदि वास्तु के नियमों का समावेश करे तो सकारात्मक ऊर्जा को आकषृ कर घर परिवार के सदस्यों को और भी अधिक ऊर्जावान और सेहतमंद बनाया जा सकता है।

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१२. रसोई व रसोईघर के लिए सही एवं उपयुक्त जगह – कैसी हो!

घरों में ‘रसोईघर’ का हमेशा से ही एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया हैं। पुराने जमाने के घरों में बड़े-बड़े रसोईघर बनवाने का प्रावधान आज भी प्राचीन वास्तु-अवशेषों के द्वारा नज़र आता हैं।

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११. प्राचीन भवन व स्थापत्य कला का शौचालय का स्थान दूर क्यों होता है?

प्राचीन काल में हमारे पूर्वजों द्वारा ऐसे ही घरों में निवास किया जाता था, जहाँ पर शौचालय घर के बाहर स्थित होते थे। यह व्यवस्था इसलिए होती थी जिससे कि शौचालयों से निकलनेवाली नकारात्मक शक्तिओं से घर में रहनेवाले सदस्यों को भली-भाँति बचाकर संयुक्त रखा जा सके

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१०. स्नानघर व प्रसाधन कक्ष तथा शौचालय आदि का उत्तर-पूर्व दिशा में होना एवं वास्तु-विज्ञान के क्षेत्र में इनका महत्त्व व उपयोगिता

वास्तु के क्षेत्र से संबंधित साहित्य जो बाज़ार में उपलब्ध हैं, इनमें मूलरुप से इस बात पर जरुरत से ज़्यादा ज़ोर दिया गया है कि घर के स्नानघरों व प्रसाधन कक्षों तथा शौचालयों को किसी भी स्थिति में उनके भवनों की नींव उत्तर-पूवी दिशा में कदापि नही होना चाहिए।

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९. मुख्यद्वार की स्थिति एवं इसकी दिशा का महत्त्व व उपयोगिता

ऐसे लोग जो पहली बार कोई नई संपत्ति खरीदना चाहते हैं या एक निवेश स्वरुप, अपनी जमा-पूँजी को लगाना चाहते हैं, तो ऐसे लोगों द्वारा बिल्डरों / प्रोमोटरों / संपत्ति-दलालों / संपत्ति डेवलपर्स आदि से यह विशेष माँग की जाती है कि उन्हें प्रापटी वहीदिखाई जाए जो उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर हो।

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८. पूजागृह या कक्ष की स्थिति उत्तर – पूर्वी दिशा में उचित या अनुचित!

इस सवाल के जवाब में, जोकि ज़्यादातर वास्तु पंडितें द्वारा चुप्पी साध ली जाती हैं अथवा बात को घुमा-फिरा कर टाल दी जाती हैं, जिसके फलस्वरुप बिना उत्तर दिए हुए यह सवाल एक अनसुलझी पहेली की तरह बनी रहती हैं।

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