वास्तु का आपके शयनकक्ष (बेडरूम) पर कैसे असर पड़ेगा ?

Vastu Shastra For Bedroom

शयनकक्ष (बेडरूम) का स्थान तथा उसकी योजना बनाने के बारे में वास्तु का उल्लेखनीय हिस्सा चित्रोंद्वारा दर्शाया जाता है । आपका सिर कौनसी दिशा में रखकर आप आराम करें और आपके बिस्तर का स्थान यह एक उल्लेखनीय पसंद है जिसे अति अधिक तर्कसंगत विचारों से लाया जाता है । यहाँ कुछ आधारभूत केंद्र-बिंदू है जिन्हें व्यक्ति ने शांति और सफलता पाने के लिए धारण करना चाहिए ।

बेडरूम के लिए वास्तु के साथ अनुकूल दिशा में सोने के लिए-

निद्रा यह एक कला है जिससे अपने शरीर तथा आत्मा पूर्णतः तनावमुक्त हो जाती है । यह वो वक्त है जब संपूर्ण दुनिया का हस्तक्षेप को रोक लगती है और शीतलता तथा स्थिरता के रास्ते पर आप एक अचिंतनीय सैर पर स्थापित हो जाते हैं । यह प्रक्रिया कमरे से शुरू होती है । निद्रा का कमरा शांति तथा सुरक्षा को एकत्रित करने के लिए घर है ।

बेडरूम के लिए वास्तु आपको स्वस्थ निद्रा के लिए आश्वासित करती है जो आपको चिंता-मुक्त रहने के लिए अति आवश्यक होती है ।

आवश्यक मूलभूत तत्त्व जिनका हमेशा ध्यान रखना चाहिए–

  • निद्रा के कमरे के दिवारों के रंग
  • बिस्तर का स्थान
  • फर्निचर तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की दिशा

निद्रा के कमरे (बेडरूम) के लिए वास्तु तथा उसके लिए उपाय –

      • बेडरूम इस तरह से निर्माण होनी चाहिये जिसमें शांति तथा सुशीलता का अनुभव हो ।
      • बेडरूम में भगवान की तस्वीरे लगाना नहीं लगानी चाहिये ।
      • पूजा घर को बेडरूम स्थित नहीं होना चाहिये ।
      • चौरस तथा आयताकार आकार के बेडरूम शांति और सामंजस्य प्राप्त करने के लिए आदर्श जगह के रूप में देखा है ।
      • अपने सबसे अनुकूल दिशा की स्थिति में अपना सिर करके सोने की वास्तु सलाह देती है ।
      • बेडरूम के लिए वास्तु प्रकाश तथा सुखदायक रंगों का उपयोग करने का सुझाव देते हैं ।
      • अपने बिस्तर के सामने आईना लगाने से बिस्तर पर सोते वक्त आराम में परेशानी उत्पन्न कर सकता है ।
      • बेडरूम में मत्सालय तथा पौधों के होने से परहेज रखना चाहिए ।
      • बेडरूम में नाजुक तथा सुखदायक रोशनी का समावेश होना चाहिए ।
      • अपने शयनकक्ष के कोने में प्रवेशद्वार या खिडकी नहीं होनी चाहिए जिससे सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है और नकारात्मक ऊर्जा का निर्वहन होता है ।

 

सरल वास्तु की मदद से बेडरूम के लिए वास्तु की सलाह लेकर परिवार में रिश्तों का गुणांक बढ़ाकर ७ चक्रों को सक्रिय किया जाता है ।