वास्तु का अपने विवाह पर कैसे असर पड़ेगा ?

विवाह हर किसी के जीवन की एक महत्त्वपूर्ण अवस्था है । पारंपरिक परिवार संरचना के अनुसार हर किसी को `गृहस्थाश्रम’ में जाना तथा दांपत्य जीवन का उपभोग लेना अनिवार्य है । `उचित जोडी’ ढूँढने की जिम्मेदारी माता-पिता, अभिभावक तथा रिश्तेदार आदि की होती है । आजकल युवा लोगों को अपनी वैवाहिक पसंद इंटरनेट की विभिन्न मॅट्रिमोनियल साईट्स या फिर सामाजिक माध्यम अथवा समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में विज्ञापन देकर खोजना पसंद है । माता-पिता अपने बेटों ओर बेटियों के लिए सही जोडीदार खोजने का प्रयास करते हैं । कभी कभी वे अपने बच्चों के लिए संभावित दुल्हा या दुल्हन खोजने के लिए रिश्तेदारों या शादी सलाहगारों की भी मदद लेते हैं ।

डॉ. श्री. चंद्रशेखर गुरूजी द्वारा अनेक वर्षों के अनुसंधान से नातेसंबंध के लिए वास्तु यह सरल वास्तुद्वारा प्रदान की गयी एक अद्वितीय तथा वैज्ञानिक वास्तु समाधान है ।

परिवार के सदस्यों के बीच रिश्ते, कार्यालय में सहकारीयों के बीच तथा व्यापार में भागीदारों के बीच के रिश्ते उनके घर, कार्यालय तथा व्यवसाय के आसपास प्रवाहित होनीवाली ऊर्जा, मुख्य रूप से क्षेत्र तथा रहने की जगह व कार्यस्थल से प्रभावित होते हैं ।

हमारे पारंपरिक परिवार के ढांचे में रिश्तों का एक बहुत महत्त्वपूर्ण हिस्सा है भले ही वो कितने ही विविध प्रकृति के हो लेकिन पति-पत्नी, भाई बहन, चाचा और चाची, करीबी दोस्त, पडोसी हमारी प्रति दिन की जिंदगी में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । हमारी संस्कृति में पति-पत्नी के बीच का रिश्ता पवित्र माना जाता है लेकिन आजकल रिश्तों का टूटना अथवा बच्चों के मुद्दों से संबंधित होनेवाले तलाक और विभाजन के मामले दुनियाभर में बहुत देखे जाते हैं । इस वजह से सामाजिक अव्यवस्था व सामाजिक अशांति का कारण बना हुआ है ।

देरी से विवाह होना तथा विवाह का टूटना जैसी समस्याओं के लिए वास्तु का महत्त्व

हर घर में और कार्यस्थल पर रिश्ते की जगह होती है । अगर रिश्ते का स्थल स्नानगृह और शौचालय तथा उपयोगिता के कमरे से प्रभावित हो जाए तो शादी के गठबंधन में समस्याएँ आती है ।

अगर किसी भी पवित्र संत या किसी भी अविवाहित अवतार की छवि बैठने के कमरे में अथवा सोने के कमरे में लगाने से शादी को विलंब होने के तथा शादी का गठबंधन टूटने के कारण स्पष्ट होते हैं ।

जब बार-बार दुल्हन देखने के बावजूद, दुल्हन को शादी के लिए उचित साथी नहीं मिलता तब यह कारण हो सकता है कि अनजाने में दुल्हन को देखने की कार्यविधि के समय उसका प्रतिकूल दिशाओं से सामना हो रहा है, जिससे शादी के प्रस्ताव में असहमति मिलती है ।

अगर भावी दुल्हन के सोने का कमरा या सोने की दिशा प्रतिकूल दिशा में है तो इससे दुल्हन के लिए स्वास्थ्य समस्याएँ आ सकती है । उदाहरण के लिए, सौंदर्य हानि या दुल्हन मोटी या फिर मोटापाग्रस्त हो जाए ।

हालांकि बाहर से कुछ भी गलत नहीं लग रहा हो जब कि दुल्हन दिखने में सुंदर हो, अच्छी शिक्षित, अच्छे स्थित परिवार से और दुल्हे के लिए एकदम अनुकूल हो जो बहुत अच्छी नौकरी कर रही हो, शानदार व्यवसाय तथा उत्तम परिवार पृष्ठभूमि से हो तब भी वे दोनों शादी के प्रयोजनों के लिए जीवनसाथी बनने के लिए वे सक्षम नही होते ।

जन्मपत्री, कुंडली और दुल्हा-दुल्हन की कुंडली पूरी तरह से मिलायी गयी हो लेकिन उनके गठबंधन को अंतिम रूप देने में कुछ अस्पष्टीकृत बाधा हो सकती है । कई संभावित दुल्हे और उनके परिवारवाले दुल्हन के घर में मुलाकात के लिए जा रहे हो लेकिन अंतिम समय में प्रारंभिक स्वीकृति के बाद भी कुछ अस्पष्ट कारणों से शादी को अंतिम रूप देने में समस्या पैदा हो जाती है जिससे दुल्हन के परिवारवाले भी भ्रमित हो जाते हैं ।

दुल्हन के परिवारवालों से दहेज अथवा तत्सम मांगो की वजह से दुल्हन के परिवारवाले गठबंधन को अंतिम रूप देने के बाद भी गठबंधन को पक्का करने के लिए उत्साहित नहीं होते ।

नया युग `फिर से जाग गया है’ जिसमें दुल्हा और दुल्हन `प्रेमविवाह’ या `एक साथ में रहने’ का प्रयोग करते हैं जबकि दुल्हा-दुल्हन के संबंधित परिवारवालों ने तय की हुई `अरेन्ज’ शादी करने के बजाय अपने जीवनसाथी को शादी से पहले जानने की कोशिश करते हैं ।

विवाह से संबंधित समस्याओं में सरल वास्तु कैसे मदद करता है ?

विवाह के लिए वास्तु में सरल वास्तु उपयोगी और आसान उपचार प्रदान करते हैं, जिससे घर या कार्यस्थल में किसी भी संबंधित निर्माण को तोड़-फोड़ या परिवर्तन किये बिना सकारात्मक ऊर्जा को दिशा देते हैं, और नकारात्मक ऊर्जा को कम करते हैं ।

सरल वास्तु विवाह से संबंधित समस्याओं पर उचित उपाय प्रदान करते हैं, जिससे प्रत्याशित शादी का गठबंधन किए हुए दुल्हा-दुल्हन के परिवारों को प्रोत्साहित करते हैं ।

विवाह के लिए वास्तु के समाधान में दुल्हन की सर्वोत्तम दिशा व भाग्यशाली रंग सूचित करते हैं, जिससे दुल्हा-दुल्हन के सकारात्मक आभा बढ़ते हैं, जिससे उनके प्रत्याशित विवाह गठबंधन वास्तविकता बनकर शादी विधिपूर्वक संपन्न होने में मदद होती है ।

रिश्तों में आनेवाली समस्याओं पर मात करने के लिए वास्तु का महत्त्व

हर घर में और कार्यस्थल पर रिश्ते की जगह होती है । कभी-कभी रिश्तों की जगह घर तथा कार्यस्थल पर नहीं होती लेकिन अगर रिश्ते का स्थल घर में है तो भी अगर वह स्नानगृह और शौचालय तथा उपयोगिता के कमरे से अवरूध्द हो जाए तो अपने आप से रिश्तों में परिवार के सदस्यों के बीच खट्टा मोड़ आना शुरू हो जाता है ।

हर घर में और कार्यस्थल पर रिश्ते की जगह होती है । लेकिन अगर रिश्ते का स्थल स्नानगृह और शौचालय तथा उपयोगिता के कमरे की वजह से अवरूध्द हो जाए तो स्वचालित रूप से रिश्तों में समस्याएँ आती है ।गर रसोईघर भी प्रतिकूल दिशा में है तो भी परिवार के सदस्यों के बीच रिश्तों पर प्रभाव पड़ता है ।

अगर किसी देवीदेवताओं की आक्रमक हावभाव की छवि बैठने के कमरे में तथा सोने के कमरे में लटकाने से परिवारों के सदस्यों के बीच अस्पष्ट झगड़ें तथा आक्रमक व्यवहार में प्रकट हो जाता है ।

जब परिवार के सदस्य अनजाने में प्रतिकूल दिशा का पालन करते हैं तब उनके ७ चक्र प्रभावित हो जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप रिश्तों में समस्याएँ, सूझबूझ की कमी, भावनात्मकता गुणक की कमी, आक्रमकता आदि के लिए कारण बनता है ।

पती-पत्नी के बीच छोटे-छोटे मुद्दों पर अक्सर झगड़े परिणामस्वरूप गंभीर परिणाम जैसे तलाक, विभक्ति अथवा रिश्तों में मनमुटाव हो सकता है ।माता-पिता और बच्चों में लगातार विचारों में अंतर होने से परिवार की शांति तथा स्वास्थ्य अस्तव्यस्त हो जाता है ।

पड़ोसियों के साथ झगड़े, परिचितों और भाई बहन के बीच अप्रत्याशित झगड़े जिससे समाज में उनकी प्रतिष्ठा कम होकर परिवार की तंदुरूस्ती पर असर होता है ।कार्यस्थल में भी पारिवारिक संबंधो को बनाए रखने में परेशानी हो सकती है ।

रिश्तों में तनाव तथा रिश्तों के टूटने के मामलों में सरल वास्तु की मदद

किसी भी तोड़-फोड़ या परिवर्तन के बिना, घर या कार्यस्थल के प्रभावित संबंधस्थान, नातेसंबंध के लिए वास्तु सरल वास्तु समाधान देता है ।

सरल वास्तु सर्वोत्तम `संबंधों की दिशा’ तथा सर्वोत्तम `सोने के लिए दिशा’ का सुझाव देता है जिससे परिवार में भावनात्मक गुणांक में सुधार होता है । परिवार के रिश्तों का गुणांक भी बढ़ जाता है जिससे ७ चक्र सक्रिय होने में मदद होती है ।

सरल वास्तु सकारात्मक छवि को दीवार पर टाँगने का सुझाव देती है जिससे परिवार के रिश्तों में सकारात्मक वाईब्स में सुधार को दर्शाता है ।

अपना व्यक्तिगत वास्तु नकाशा प्राप्त कीजिये और यह वास्तु नकाशा आपके कार्यस्थल तथा घर से सुसंगत है या नही इसका विश्लेषण कीजिये ।