वास्तु का आपके प्रवेश द्वार व मुख्य द्वार पर कैसे असर पड़ेगा ?

आमतौर पर यह देखा गया है कि लोग रहने के लिए नयी जगह खरीदना या निवेश करने के लिए सोचते हैं तब बिल्डर / विकासक / दलाल से जगह उनकी सबसे अनुकूल दिशाओं का सामना करनेवाली हो इसकी मांग करते हैं । लोग जिनका अपना खुद का भूखंड होता है और वह उसपर नए घर का निर्माण करने की योजना बनाते हैं साथ ही सबसे अनुकूल दिशा में निर्माण होने का आग्रह करते हैं । हम बहुत सारे परिवारों के बारे में जानते है – संयुक्त या एकल परिवार जो घर की अपनी प्रतिकूल दिशाओं की तरफ सामना करते हुए भी तरक्की करते हैं या सफल होते हैं बावजूद इसके की वे इस प्रकार के घर में रहते हैं ।

इस प्रकार की असमानता की स्थिति में याद रखने योग्य सबसे प्रतिकात्मक बात यह है कि पिता, जो समृध्दि और रईसी का अनुभव लेते हैं तथा उन सभी चीजों को पाते हैं जो जीवन में प्राप्त होनी चाहिए । लेकिन जब उनका बेटा आजीविका के लिए उनका दायित्व उठाने के लिए तैयार हो जाता है तब एक ही घर होने के बावजूद वो सफल होने में विफल रहता है । प्रवेश द्वार व मुख्य द्वार के लिए वास्तु के स्थान के संबंध में इस प्रकार की वास्तु असममिति की विचित्र स्थिति को स्पष्ट करना बहुत ही मुश्किल है । मुख्य द्वार यहां पर कैसे दोषी हो सकता है ?

प्रवेश द्वार व मुख्य द्वार के लिए सर्वोत्तम वास्तु प्राप्त किजिए

सरल वास्तु के अनुसार, व्यक्ति की जन्मतिथि पर आधारित, व्यक्ति के लिए उचित अनुकूल दिशा को निश्चित किया जाता है । वास्तु संबंधी अपने प्रवेश द्वार व मुख्य द्वार के लिए वास्तु किन चीजों का ध्यान रखना जरूरी है –

  • हमेशा मुख्य द्वार पर कुड़ेदान को रखना वर्जित है ।
  • मुख्य द्वार गहरे रंग का ना हो तथा यह जगह हमेशा काफी मात्रा में चमकदार हो इसका आश्वासन दें ।
  • मुख्य द्वार किसी भी अव्यवस्था से मुक्त रखें जिससे आसपास में सकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित कर सकें ।
  • मुख्य द्वार को ओम, स्वस्तिक तथा फुलों से सुशोभित करें साथ ही दिया जलाएँ, अगरबत्तियाँ लगाएँ जिससे सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करने में मदद मिलेगी ।
  • मुख्य द्वार किसी भी धार्मिक स्थान या परित्यक्त इमारत के सामने ना हो जिससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवाह अधिक बढ़े ।
  • मुख्य द्वार में कोई भी दीवार बाधा के रूप में नहीं हो जिससे घर में ऊर्जा का प्रवाह में रूकावट पैदा होती है ।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य द्वार अथवा किसी भी जगह का घर में रहनेवाले या कार्यस्थल स्थित लोगों पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है । मुख्य द्वार की दिशा यह मुख्य द्वार से संबंधित सबसे महत्त्वपूर्ण मुद्दा है । मुख्य द्वार की ८ संभाव्य दिशाएँ होती है और उसमें से लोगों की जन्मतिथि तथा लिंग के आधार पर हर दिशा कुछ लोगों को अनुकूल होती है और अन्य लोगों के लिए प्रतिकूल होती है ।

मुख्य द्वार की दिशा –

वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार या और कोई भी जगह पर वहाँ के रहनेवाले अथवा काम करनेवाले लोगों के जीवन पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है । मुख्य द्वार की दिशा यह मुख्य द्वार से संबंधित सबसे महत्त्वपूर्ण मुद्दा है । मुख्य द्वार की ८ संभाव्य दिशाएँ होती है और उसमें से लोगों की जन्मतिथि तथा लिंग के आधार पर हर दिशा कुछ लोगों को अनुकूल होती है और अन्य लोगों के लिए प्रतिकूल होती है ।