किसी आवास का मुख्य प्रवेश द्वार सकारात्मक और नकारात्मक दोनो ऊर्जाओं को पार करने के लिए प्रवेश द्वार होता है । अधिकांश सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जाएँ यहाँ संचित हो जाती है और इसलिए आवास का यह हिस्सा अत्यंत सावधानी के साथ बनाए रखा जाना चाहिए । आपके घर में हितस्वास्थ्य तथा समृध्दि को बनाए रखने के लिए आपके मुख्य द्वार सबसे अच्छी दिशा में स्थित होने चाहिए । अगर यह दिशा गलत है तो नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को बढ़ा सकता है और परिवार के सदस्यों के जीवन को प्रभावित कर सकता है । इसलिए घर को खरीदने से अथवा उसे किराये पर देने से पहले, व्यक्ति ने सुनिश्चित करना चाहिए की परिवार के पोषणकर्ता अथवा घर के मालिक की अनुकूल दिशा मुख्य द्वार की दिशा के साथ समांतर ( संरेखण ) होनी चाहिए । मुख्य प्रवेश द्वार की दिशा परिवार को प्रभावित करती है जो पोषणकर्ता की चार अनुकूल तथा चार प्रतिकूल दिशाओं पर निर्भर करता है ।

दक्षिण पश्चिम दिशा मुखी घर का मुख्य प्रवेश द्वार -
पोषणकर्ता की अनुकूल दिशाएँ -
  • १ ली ( प्रथम ) अनुकूल दिशा –

प्रथम अनुकूल दिशा का सामना करनेवाला मुख्य द्वार यह एक आदर्श स्थिति है । इससे व्यक्ति को अपने कारकीर्द तथा व्यवसाय में सफलता प्राप्त हो सकती है, पदोन्नति होने की संभाव्यताओं में वृध्दि हो सकती है तथा आर्थिक स्थिति में स्थिर विकास होगा । शिक्षा, एकाग्रता का स्तर तथा बच्चों का ज्ञान में सुधार हो सकता है । पति व पत्नि के संबंधो में साथ ही साथ परिवार के भीतर सामान्य संबंध अच्छे बन सकते हैं । व्यक्ति अपने जीवन में नाम तथा प्रसिध्दि प्राप्त कर सकता है । यहां दक्षिण पश्चिम दिशा मुखी घर एक से अधिक तरीकों से फायदेमंद साबित होता है ।

  • २ री ( दूसरी ) अनुकूल दिशा –

व्यक्ति अपना पारिवारिक जीवन इस मामले में खुशी से व्यतित करता है । वह या वह ( स्री ) के कैरियर में नियमित रूप से विकास होता है । संपूर्ण परिवार पर अच्छे आरोग्य का दुर्घटनाओं की बहुतही कम आशंकाओं के साथ आशिर्वाद रहेगा । कोई भी कानूनी समस्याओं का उनके पक्ष में हल हो जाएगा ।

  • ३ री ( तीसरी ) अनुकूल दिशा –

व्यक्ति का पारिवारिक जीवन परम सुखी तथा संपूर्ण हो जाएगा । वे अपने परिवार तथा दोस्तों से अच्छा समर्थन प्राप्त कर सकेंगे । अपने व्यापार में वृध्दि करने हेतु व्यावसायिकों को अच्छा तथा त्वरित समर्थन प्राप्त होगा । वास्तु अनुसार आग से संबंधित दुर्घटनाएँ तथा चोरों से निवासियों को परेशानी नहीं होगी । स्वाभाविक रूप से, योग्य दक्षिण पश्चिम दिशा मुखी घर की उचित पहचान महत्त्वपूर्ण है ।

  • ४ थी ( चौथी ) अनुकूल दिशा –

अपनी ४ थी अनुकूल दिशा का सामना करनेवाले घर में रहनेवाले व्यक्तियों को हमेशा भाग्य का अनुग्रह प्राप्त हो जाएगा । कोई भी विलंबित कानूनी मामलों का शीघ्रता से तथा आर्थिक रूप से समाधान किया जाएगा । इस घर में हात में लिया हुआ कोई भी कार्य बिना बाधाओं के साथ पूरा हो जाएगा । परिवार में किसी भी प्रकार के झगड़े नहीं होंगे और परिवार के सदस्य किसी भी दुर्घटनाओं में अंतर्भूत नहीं होंगे ।

हालांकि हर अनुकूल दिशा के अपने गुण होते हैं लेकिन दक्षिण पश्चिम दिशा मुखी घर को वास्तु अनुरूप बनाना महत्त्वपूर्ण है क्योंकि जीवन के किसी भी प्रकार के एक पहलू में समस्या की वजह से दूसरी और समस्याओं को गति मिल सकती है । उदाहरण के तौर पर, अगर परिवार में नियमित रूप से पैसे आ रहें है और परिवार आर्थिक रूप से मज़बूत है लेकिन परिवार के सदस्यों में से हर व्यक्ति लगातार स्वास्थ्य संबंधी समस्योओं का सामना कर रहा है तब कमाया हुए पैसा मेडिकल बीलों पर खर्च हो जाएगा । इसका मतलब है कि अपने धन के रिसाव को प्रतिबंधित करने में वो सक्षम नहीं है जो अप्रत्यक्षरूप से संपूर्ण हितस्वास्थ्य् और खुशी को प्रभावित करता है । इसलिए हमेशा आवास को वास्तु अनुरूप बनाने के लिए प्रयास करें ।

पोषणकर्ता की प्रतिकूल दिशाएँ -
  • १ ली ( प्रथम ) प्रतिकूल दिशा –

प्रथम प्रतिकूल दिशा का सामना करनेवाले इस विशिष्ट घर में रहने से कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है । व्यक्ति की आर्थिक मजबूती में अभाव होगा और कार्यालय तथा व्यवसाय में समस्याएँ होगी । परिवार के अंदर तथा पति और पत्नि के बीच के संबंधों में समस्याएँ पैदा हो सकती है । बच्चों को अपनी पढ़ाई में संघर्ष करना पड़ सकता है । सामन्य रूप से, परिवार से खुशी भाग जाएगी ।

  • २ री ( दूसरी ) प्रतिकूल दिशा –

व्यक्ति को कार्यालय तथा घर इन दोनों जगहों पर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है । परिवार स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के साथ साथ अधिक से अधिक दुर्घटनाओं से प्रभावित हो जाएंगे । अदालत के मामलों में हार जाने की संभावनाएँ अधिक होगी जिसकी वजह से दक्षिण पश्चिम दिशा मुखी घर का चयन करना अधिक महत्त्वपूर्ण होता है ।

  • ३ री ( तीसरी ) प्रतिकूल दिशा –

३ री प्रतिकूल दिशा का सामना करनेवाले इस विशिष्ट घर में रहने से व्यक्ति अपने घर में समस्याओं का सामना कर सकता है और अपने व्यापार तथा काम में किसी की सहायता प्राप्त करने का आनंद नहीं ले सकता । आग से संबंधित दुर्घटनाएँ तथा चोरी की संभावनाएँ अधिक होती है ।

  • ४ थी ( चौथी ) प्रतिकूल दिशा –

इन घरों में रहनेवाले लोगों के घरों में लगातार झगड़े होते हैं तथा दुर्भाग्य के साथ सबकुछ बिगड़ जाता है । निवासियों को किसी भी प्रकार के कार्य को पूरा करना या अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना मुश्किल लगता है । कानूनी मसलें उत्तरोत्तर बढ़कर नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं । इसलिए, दक्षिण पश्चिम दिशा मुखी घर में रहना अनिवार्य है ।