पूजा कक्ष के लिए वास्तु

वास्तु के अनुसार पूजा कक्ष में “अंजना चक्र” ज्ञान और बुद्धिमत्ता का होता है एवम “सहस्त्रा चक्र” को बेहतर स्वास्थ्य, परिवार के बीच सही ताल मेल व शांति लाने के लिए जाना जाता है।

पूजा कक्ष घर का सबसे पवित्र स्थान है। यह वह कक्ष है जहाँ हमें मन की शांति तो मिलती ही है साथ ही हम अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना भी करते है। अगर किसी भी प्रकार की नकरात्मकता पूजा कक्ष में है तो ये घर की उन्नति, भाग्य, कल्याण और सफलता को प्रभावित करती है।

पूजा कक्ष के लिए वास्तु को पूजा कक्ष के लिए वास्तु शास्त्र के रूप में भी जाना जाता है। इसमें मूर्तियों का स्थान, पूजा स्थल की दिशा और पूजा कक्ष में रखी जाने वाली विभिन्न वस्तुओं को शामिल किया जाता है।

पूजा कक्ष के लिए सरल वास्तु नकारात्मक ऊर्जा को हटा कर, सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए विभिन्न समाधान देता है।

पूजा कक्ष वह कक्ष है जिसमे वास्तु शास्त्र का खास ध्यान रखा जाना चाहिए क्योंकि यह सकारात्मक ऊर्जा के प्रमुख स्रोतों में से एक है। पूजा कक्ष में व्यक्ति को शांति व संतुष्टि प्राप्त होती है।

पूजा कक्ष के लिए 7 प्रभावी वास्तु उपाय:

गुरुजी के सरल वास्तु सिद्धांत पर आधारित:

  • पूजा कक्ष में स्लैब का आकार गुंबद या पिरामिड हो जिससे समान ब्रह्मांडीय/कॉस्मिक ऊर्जा का वितरण हो
  • पूजा कक्ष के पास बेडरूम या बेडरूम से सटी दीवार न हो
  • पूजा कक्ष में बाथरूम और शौचालय न हो
  • पूजा कक्ष स्नान कक्ष या शौचालय के नीचे न हो
  • पूजा कक्ष के अंदर या आस-पास कूड़ेदान या किसी भी प्रकार की गंदगी न हो
  • भगवान की टूटी व खंडित मूर्तियां या चित्र कभी न रखें
  • मूर्तियों को फर्श पर न रखें, मूर्ति को एक उभरे हुए मंच पर रखें

वास्तु से संबंधित पूजा कक्ष के 7 सामान्य मिथक

19 सालो से, गुरूजी ने सरल वास्तु सिद्धांतों के माध्यम से, लाखों अनुयायियों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है।
गुरुजी के अनुसार, वास्तु शास्त्र हर व्यक्ति के जन्मतारीख पर आधारित एक विज्ञान है। ये सभी पर एक समान लागू नहीं होता।उदाहरण के लिए एक घर में जहां सभी परिवारजन आर्थिक व शारीरिक रूप से सुदृढ़ हैं वहीं दूसरे परिवार को कई प्रकार की शारीरिक व आर्थिक हानि का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए सरल वास्तु के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति के लिए वास्तु के व्यक्तिगत समाधान होते हैं जो उनकी जन्म-तिथि पर आधारित होते हैं।

“गुरुजी” के अनुसार पूजा कक्ष के लिए फैले निम्नलिखित मिथक:

  • पूजा कक्ष में मूर्तियां न रखें
  • प्रार्थना या पूजा करते समय उत्तर या पूर्व दिशा में मुंह रखें
  • अगर मूर्ति स्थापित करनी हो तो मूर्ति 9 सेमी/इंच से अधिक व 2 सेमी/इंच से कम ऊँचाई की न हो
  • पूजा कक्ष की दीवारों के लिए पीला और सफेद सही रंग है
  • मूर्ति की लंबाई पूजा करने वाले व्यक्ति की छाती तक हो
  • अग्निकुंड की दिशा दक्षिण पूर्व हो
  • पूजा कक्ष का रंग नीला या सफेद हो
  • कारखानों में, पूजा घर केंद्र में हो

वास्तु सलाहकारों में सरल वास्तु सबसे बेहतरीन विकल्प है जो कि वैज्ञानिक आधार पर आसान उपायों द्वारा, घर में बिना किसी टूट-फूट एवं बड़े बदलावों के सकारात्मकता व सामंजस्य लाने में मदद करता है।

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