पूजा कक्ष पर वास्तु का कैसे असर पड़ेगा ?

शौचालय, स्नानगृह तथा उपयोगिता कमरे को बगल में छोड़कर बाकी कहीं भी पूजा कक्ष स्थित हो सकता है । बहुमंजिल इमारतों में घर के ऊपर या नीचे अगर स्नानगृह अथवा शौचालय है तो पूजा कक्ष नहीं होना चाहिए । इसका एक सरल कारण है कि, पूजा कक्ष में अन्य अनुष्ठानों के बाद दिये जलाना, भगवान को फूल चढ़ाना तथा कपूर या सुगंधि अगरबत्तियों को जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण कर सकते हैं । प्रार्थना के माध्यम से ज्ञान और बुध्दिमत्ता के लिए अजना चक्र तथा सहस्र चक्र जो भगवान के करीब है, आत्मज्ञान के लिए सक्रिय कर सकते हैं ।

अगर पूजा कक्ष स्नानगृह अथवा शौचालय के निकट हैं तो उससे अधिकतम नकारात्मक ऊर्जा पैदा हो सकती है और वातावरण का मौजुदा संतुलन बिगड़ने की संभावना हो सकती है । घर में सकारात्मक ऊर्जा का होना या फिर उसे पैदा करना यह दो तरीकों के बारे में व्यक्ति को समझ होनी जरूरी है । सरल वास्तु इस समस्या का आसान और वैज्ञानिक समाधान प्रदान करता है ।


पूजा कक्ष के लिए वास्तु की सहायता से घर में सकारात्मक ऊर्जा को कैसे उत्पन्न करते हैं ?

अमंगल से संरक्षण करने के लिए देवी-देवताओं के चरणों से लिए गए फुलों व पत्तों को अपने पास रखने के लिए लोग बहुत महत्त्व देते हैं । त्योहारो के दिनों में लोग फूल ओर पत्तों के तोरण, मालाएँ, गुलदस्त तथा फुलों के आभूषणों से अपने घर को सजाते हैं ।

घरो में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह के लिए पानी एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण घटक है । बहुत ही स्वाभाविक तथा सूक्ष्म तरीके से पानी बहने की ध्वनि जीवन में `शांति और सौहार्द’ का प्रतिक सूचित करता है ।

अपना व्यक्तिगत वास्तु नकाशा प्राप्त कीजिये और यह वास्तु नकाशा आपके कार्यस्थल तथा घर से सुसंगत है या नही इसका विश्लेषण कीजिये ।