भूखंड अथवा घर के नौ खगोलीय तत्व या स्थान

वास्तु शास्र के अनुसार, हर भूखंड अथवा घर के आकार पर ध्यान दिए बिना ही भूखंड या घर को नौ खंडो में या भागों में विभाजित किया जाता है । वास्तुकला में हर खंड का एक परिभाषित उद्देश्य होता है और अगर घर निवासस्थान के लिए वास्तु सिध्दांतों के अनुसार निर्माण नहीं किया गया है तो नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक गंभीर हो जाता है ।

अगर मुख्य प्रवेश द्वार घर के कमानेवाले की प्रथम अनुकूल दिशा में स्थित है लेकिन कमरे, रसोईघर और शौचालय का निर्माण गलत खंड में किया गया है तो घर के निवासियों को विभिन्न प्रकार की मुसीबतों का सामना करना पड़ता है ।

शौचालय तथा साफसफाई के लिए सिंक अगर गलत वृत्तखंड में निर्मित है तो पूरे घर में नकारात्मक ऊर्जा में वृध्दि होती है जो निवासियों के हित स्वास्थ्य को प्रभावित करती है ।

निवासस्थान के लिए वास्तु को लागू करना बहुत कठीन है क्योंकि उसमें बहुत से मापदण्ड शामिल होते हैं । सरल वास्तु के सलाहकार आपके घर के हर पहलू का जैसे प्रमुख द्वार, संरचना के अलग अलग खंड, ऊर्जा के क्षेत्र, परिवेश और पंचधातु का विश्लेषण करते हैं । बाद में सरल वास्तु के वास्तु परामर्श दाता घर के प्रमुख कमानेवाले की अनुकूल दिशा पर आधारित वास्तु उपायों के बारे में विचार करते हैं जो संपूर्ण घर के लिए संपत्ति, स्वास्थ्य, सामंजस्य, शांति और खुशी को ढूँढ निकालने में मदद करते है । यह कहा जाता है कि घर व्यक्ति को ६७% वास्तु सहायता प्रदान करता है और इसलिए आपके घर को वास्तु परिपूर्ण करना अति आवश्यक हो जाता है । अपने जीवन की बेहतरी के लिए सरल वास्तु के विशेषज्ञों को निसंकोच संपर्क करें ।