घर में रसोई का निर्माण करते समय उसकी संरचना पर सबसे अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। यही वह स्थान है जहां पर अग्नि तत्व रहता यानि कि यही वह जगह है जहां से परिवार के प्रत्येक सदस्य का स्वास्थ्य प्रभावित होता है। भोजन पोष्टिक और सकारात्मक गुणों वाला हो इस पर वास्तु विशेष ध्यान देता है। रसोई बनाते के लिए दो और महत्वपूर्ण कारणों पर ध्यान देना ज़रूरी है। पहला कि ये वह स्थान है जहां पर घर के लोगों के लिए भोजन बनाया जाता है और दूसरा की घर की महिलाएं अपना अधिकतर समय रसोई में ही बिताती है। इसलिए रसोई में लगाए जाने वाले उपकरणों की दिशा के लिए वास्तु नियमों का विशेष रूप से पालन किया जाना चाहिए।

क्या आप जानते है?

सरल वास्तु सिद्धांतो को अपने जीवन में अपनाने के बाद आपके जीवन से सम्बंधित कई समस्याओं को आप 7 से 180 दिनों के भीतर हल कर सकते हैं।

इसके जरिए आप अपने जीवन की अनेक समस्याओं जैसे स्वास्थ्य, धन, शिक्षा, विवाह, रिश्ते, नौकरी या करियर और व्यवसाय आदि को हल कर सकते हैं।

नीचे रसोई के लिए कुछ वास्तु टिप्स दिए गए हैं

  • जांचें कि आपके रसोई के उपकरण कैसे रखे गए हैं। यदि स्टोव और पानी के सिंक को सही जगह और दिशा में नहीं रखा गया है तो इससे घर में लगातार झगड़े होंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये दोनों अलग-अलग तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्हें एक साथ रखने से घर में तनाव पैदा होता है।

  • स्टोव नोब को परिवार के प्रमुख के अनुकूल दिशा में रखा जाना चाहिए। यह पूरे परिवार के लिए अच्छा स्वास्थ्य सुनिश्चित करता है। सरल वास्तु आपको अपने चार अनुकूल दिशाओं को निर्धारित करने या जानने में मदद कर सकता है।
  • रसोईघर सीढ़ियों के पास नहीं होना चाहिए क्योंकि यह ऊर्जा के प्रवाह को अवरुद्ध करता है।
  • रसोई के बेसिन के नल से कभी भी पानी का रिसाव नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे बड़ी वित्तीय हानि होती है। आप धन को बरकरार नहीं रख पाते। पानी का रिसाव लगातार पैसा खोने का प्रतीक है।
  • किचन में हर चीज हमेशा साफ-सुथरी होनी चाहिए क्योंकि गंदा किचन नकारात्मक ऊर्जा को जमा करता है
  • स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से गैस स्टोव व रसोई पट्टी को रोज़ साफ करना चाहिए।

गुरुजी के सरल वास्तु सिद्धांतों के अनुसार, व्यक्तियों और परिवारों द्वारा सामना की जाने वाली बाधाएं या समस्याएँ उनके भीतर और आस-पास कॉस्मिक ऊर्जा के असंतुलन के कारण होती हैं।

आप कॉस्मिक ऊर्जा को संतुलित करके अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाकर समस्याओं को दूर कर सकते हैं।

गुरुजी के सरल वास्तु सिद्धांत:

  • दिशाओं के साथ कॉस्मिक ऊर्जा से जुड़ें
  • संरचना के साथ कॉस्मिक ऊर्जा को संतुलित करें
  • चक्रों के साथ कॉस्मिक ऊर्जा को चैनलाइज़ करें।

गुरुजी के अनुसार, किसी व्यक्ति के लिए सही दिशा केवल उसकी जन्म तिथि पर आधारित होती है

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