घर का वो हिस्सा जहां हम जाकर अपनी सारी परेशानियों से निजात पाते हैं वह है हमारा शयनकक्ष। यहीं आकर हम अपने दिनभर की थकावट को दूर करते हैं। इसी जगह हम आराम करते हैं और सोते हैं और अगले दिन के लिए खुद को तरोताज़ा और ऊर्जावान करते है। परन्तु यदि उसी शयनकक्ष का वातावण नकारात्मकता से भरा हो तो ना हम सुकून भरी नींद ले सकते हैं और ना ही खुद को ऊर्जावान व सुखी बना सकते हैं। यदि शयनकक्ष में इस ऊर्जा के प्रवाह में कोई अवरोध आता है तो वह घर की शांति व सामंजस्य में परेशानी पैदा करता है।

सरल वास्तु द्वारा आपके शयनकक्ष की सकारात्मकता और शुद्धता को बढ़ाने के लिए कुछ सरल और आसानी से लागू किये जाने वाले कुछ तरीके बताये गए हैं।

स्वछता बनाए रखें: शयनकक्ष की साफ सफाई पर पूरा ध्यान दें। कमरे में धूल मिट्टी ना जमने दें। प्रतिदिन कमरे कि सफाई करें व जाले ना आने दें। कोनों को साफ रखें। इससे कमरे में नकारात्मकता का अनुभव नहीं होगा। आपको अपने कमरे में ज्यादा सुकून और शान्ति का एहसास होगा और आप सकारात्मक और ख़ुश अनुभव करेंगे।

अनावश्क वस्तुओं को हटा दें: घर में और विशेष रूप से हम हमारे शयनकक्ष में बहुत ही अवांछित चीज़े और फर्नीचर रख लेते हैं। जिनके होने से कमरे में अनचाही नकारात्मकता का प्रवाह बढ़ने लगता है। इसलिए इन अनचाही वस्तुओं, फर्नीचर आदि को हटा कर वहां पर कॉस्मिक उर्जा के प्रवाह को सुचारू करें। इससे आपके शयनकक्ष का माहौल सुखद बनगा।

अच्छे और सकारात्मक चित्र/तस्वीरें लगाएं:घर में निराशावादी और आपके मन में असंतोष पैदा करने वाली तस्वीरों का प्रयोग बिल्कुल ना करें। ये आपकी अंदरूनी खुशी को प्रभावित करके आपके भीतर डर और निराशा की भावना लाती हैं। कमरे में से इसी तस्वीरों को तुरंत निकाल देना चाहिए । इसलिए अपने कमरे में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाने के लिए प्रसन्नता देने वाली, अच्छे लोगो की, पर्यावरण और भगवान के चित्रों को लगाएं। ये आपके दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाए रखता है।

नकारात्मकता को हटाएं: यदि आपने अपने घर के निर्माण में शयनकक्ष के अंदर शौचायल (अटैच्ड बाथरूम) बनाया है तो ये साफ तौर से आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाता है। इसलिए ये ध्यान रखें कि उस शोचलाय का दरवाज़ा बंद रहे। यह सुनिश्चित करता है कि आपके कमरे में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश न हो। इसकी नकारात्मकता को खत्म करने के लिए शौचालय में कोई पौधा या फिर साधारण नमक रखें।

उपरोक्त लिखित उपाय आपके घर और मन के भीतर के असंतुलन को समाप्त करते हैं। इन उपायों को अपनाने के बाद आप अपने परिवार के साथ अच्छा समय बिताने के साथ अच्छी नींद और आराम का अनुभव करेंगें। अपने जीवन में सरल वास्तु को अपनाकर केवल 7 से 180 दिनों में सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव कर सकते है। एक बार अपनाएं, जीवनभर आराम पाएं।

क्या आप जानते हैं?

सरल वास्तु सिद्धांत अपनाने के बाद आपके जीवन में इसका असर 7 से 180 दिनों के भीतर आने लगता है जो आपके जीवन में सकारात्मक प्रभाव लाता है और आपके जीवन में होने वाली समस्याओं को दूर करता है।

जीवन में शामिल समस्याओं में हैं स्वास्थ्य, समस्याएं, शिक्षा, विवाह, रिश्ते, नौकरी या करियर, व्यावसायिक समस्याएं आदि। सरल वास्तु इन सभी समस्याओं का उपयुक्त समाधान देता है।

शयनकक्ष के लिए वास्तु कब अपनाएं :

  • अगर आप अपने घर के लिए प्लॉट खरीदने की योजना बना रहे हैं।
  • अगर आप घर बनाने की योजना बना रहे हैं।
  • यदि आप पहले से ही अपने मौजूदा घर में समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

गुरुजी के सरल वास्तु सिद्धांतों के अनुसार, किसी व्यक्ति और परिवार द्वारा सामना की जाने वाली बाधाएं उनके भीतर और आस-पास मौजूद कॉस्मिक ऊर्जा के असंतुलन के कारण होती हैं।

आप कॉस्मिक ऊर्जा को संतुलित कर अपने जीवन में होने वाली समस्याओं को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकते हैं।

गुरुजी के सरल वास्तु सिद्धांत:

  • दिशाओं के साथ कॉस्मिक ऊर्जा से जुड़ें।
  • संरचना के साथ कॉस्मिक ऊर्जा को संतुलित करें।
  • चक्रों के साथ कॉस्मिक ऊर्जा को चैनलाइज़ करें।

गुरुजी के अनुसार, किसी व्यक्ति के लिए सही दिशा केवल उसकी जन्म तिथि पर आधारित होती है।

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