किसी भी दुकान के लिए मशहूर होने और सफलता हासिल करने के लिए अच्छा प्रबंधन और ग्राहकों को दोस्ताना सेवाएं प्रदान करना जैसे दो तत्व ही पर्याप्त नहीं हैं। उचित निर्माण और /या बहुमूल्य वस्तुओं और फर्नीचर का दुकान (शोरूम) के भीतर उचित व्यवस्था भी अनिवार्य है। दुकानों के लिए वास्तु शास्त्र, वहां के वास्तु को अनुरूप बना देता है जिससे दुकान में सम्पदा का प्रवाह सुगम हो जाता है और ग्राहकों का अनुभव समृद्ध हो जाता है। दुकानों के लिए वास्तु द्वारा दुकान/शोरूम में वास्तु से संबंधित दोषों को दूर किया जाता है और बिक्री बढ़ोतरी, सम्पदा और ग्राहकों का बेहतर आगमन, बेहतर ग्राहक-मालिक समझबूझ आदि विकसित होती है। उचित निर्माण और दुकान के भीतर उत्पादों की वैज्ञानिक व्यवस्था से ग्राहकों पर आकर्षक आभा और प्रतिष्ठा का विकास होता है।

दुकानों के लिए वास्तु से संबंधित विशेष सिद्धांत हैं जो कि घरों के लिए वास्तु से भिन्न हैं। वास्तु विशेषज्ञ दिशा, अभिमुखन, नकदी काउंटर और अन्य सामग्रियों की स्थिति के आधार पर अवसंरचना में परिवर्तन करते हैं। वास्तु सवंर्धन सामग्रियां भी उपलब्ध हैं जो कि कु-प्रभावों को दूर करती हैं और कारोबार में समृद्धि का वास होता है। वर्तमान में अधिक से अधिक लोग वास्तु की प्रभाविकता और कार्य कुशलता को समझते हैं और इसे चुन रहे हैं।

दुकानों के लिए वास्तु के लिए कुछ सामान्य वास्तु टिप्स

  1. दुकान के मालिक की सीट उसकी पसंदीदा दिशा में होनी चाहिए।
  2. दुकान या शोरूम का पसंदीदा आंतरिक प्लॉट आयताकार या वर्गाकार होना चाहिए
  3. दुकान का मुख्य प्रवेश द्वार में कोई शोर नहीं होना चाहिए तथा उसके आसपास सामान का ढ़ेर नहीं होना चाहिए।
  4. धन के लिए वास्तु शास्त्र के आधार पर नकदी काउंटर और देवी देवताओं की मूर्तियों को रखा जाना चाहिए।
  5. अपनी दुकान को धूल मिट्टी से रहित रखें ताकि सकारात्मक उर्जा में बढ़ोतरी की जा सके और ग्राहकों को प्रभावित किया जा सके।

दुकान की लोकेशन और अवसंरचना के आधार के साथ साथ इसके मालिक के व्यक्तित्व के आधार पर दुकानों के लिए अनेक अन्य वास्तु टिप्स उपलब्ध हैं। सरल वास्तु द्वारा अपने स्वयं की वास्तु विधियों के साथ-साथ दुकानों से संबंधित वास्तु के सिद्धान्तों पर विचार किया जाता है, ताकि दुकान/शोरूम और साथ ही मालिक और कर्मचारियों की सफलता और सम्पन्नता को सुनिश्चित किया जा सके।