शैक्षिक संस्थानों के लिए वास्तु का महत्त्व -

शैक्षिक संस्थानों के लिए वास्तु उस शिक्षण संस्था, उसी प्रकार से छात्र तथा शिक्षकों की सफलता में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है । अधिकांश सफल शैक्षिक संस्थाएँ, वास्तु के उचित अनुपालन से वास्तुकला की महान मिसालें हैं ।

सरल वास्तु के अनुसार, शैक्षिक संस्थानों के लिए वास्तु के साथ संस्था के प्रमुख की वास्तु दिशाओं का एक श्रेणी में आना जरूरी होता है । संस्था का वास्तु अगर प्रमुख से सम्मत नहीं है तो वास्तु संबंधी अनुरूपता ते मुद्दों पर नियंत्रण रखने के लिए उपाय दे सकते हैं ।

छात्रों के लिए –
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शैक्षिक संस्था जैसे विद्यालय, महाविद्यालय तथा कोचिंग संस्था जिसमें छात्र अपना अधिकतर समय पाठ्यक्रम के द्वारा अध्ययन करने में, शिक्षकों को सुनने में व्यतित करते हैं । छात्रों के लिए सही दिशा में बैठना यह महत्त्वपूर्ण है जिससे उनके चक्र (अजना चक्र) उचित रीति से सक्रिय रहें और छात्र एकाग्रता से संकल्पनाओं को सुनने तथा समझने में सक्षम हो । सभी अध्ययन टेबल साफसुथरे हो । कई किताबें या वस्तुओं से टेबल भारित ना हो ।

कक्षा के लिए –
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एक सफल शैक्षणिक संस्था चलाने के लिए कक्षा का अत्यंत महत्त्व होता है जहां छात्र अपना अधिकतम समय व्यतित करते हैं । कक्षा साफ, प्रसन्न, किसी भी बुरे गंध से मुक्त, बहुत ज्यादा खुले प्रकाश और हवा से युक्त होनी चाहिए । कक्षा के स्थान का ध्यान रखना आवश्यक है जिससे छात्र शोर तथा कक्षा के आसपास की भीड़ से बच सकते हैं । बीम अथवा स्नानगृह के नीचे कक्षा का स्थान ना हो । कक्षा में छात्रों को प्रेरित और प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित करनेवाले लोगों की छवि तथा चिन्हों को सही जगह पर स्थित किया जाए । चलते हुए घोड़े, उगता सूरज, देवी सरस्वती का चित्र, छात्रों की पिछली उपलब्धियों दर्शाती हुई तस्वीरें तथा विजय चिन्ह (ट्रॉफीयाँ) प्रतीकों में शामील है ।

कक्षा को गहरे रंगो से रंग दें । एकाग्रता में बाधाएँ लानेवाले खंबे, फर्निचर के नुकीले किनारे, खुले अलमारियों से परहेज करें । अध्ययन टेबल दीवार के सामने ना रखें ।

अपना व्यक्तिगत वास्तु नकाशा प्राप्त कीजिये और यह वास्तु नकाशा आपके कार्यस्थल तथा घर से सुसंगत है या नही इसका विश्लेषण कीजिये ।