Scientific Analysis Of The North East Direction-Saral Vaastu

१३. उत्तरी-पूर्व दिशा का वैज्ञानिक विश्लेषण

भारतीय प्राचीन ग्रंथ वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि हम घर को बनवाते समय या उसमे सामान व्यवस्थित करते समय यदि वास्तु के नियमों का समावेश करे तो सकारात्मक ऊर्जा को आकषृ कर घर परिवार के सदस्यों को और भी अधिक ऊर्जावान और सेहतमंद बनाया जा सकता है।

Right Location For Kitchen-Saral Vaastu

१२. रसोई व रसोईघर के लिए सही एवं उपयुक्त जगह – कैसी हो!

घरों में ‘रसोईघर’ का हमेशा से ही एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया हैं। पुराने जमाने के घरों में बड़े-बड़े रसोईघर बनवाने का प्रावधान आज भी प्राचीन वास्तु-अवशेषों के द्वारा नज़र आता हैं।

Toilets, Outside The Main House-Saral Vaastu

११. प्राचीन भवन व स्थापत्य कला का शौचालय का स्थान दूर क्यों होता है?

प्राचीन काल में हमारे पूर्वजों द्वारा ऐसे ही घरों में निवास किया जाता था, जहाँ पर शौचालय घर के बाहर स्थित होते थे। यह व्यवस्था इसलिए होती थी जिससे कि शौचालयों से निकलनेवाली नकारात्मक शक्तिओं से घर में रहनेवाले सदस्यों को

Toilets, Bathrooms In The North-East Direction-Saral Vaastu

१०. स्नानघर व प्रसाधन कक्ष तथा शौचालय आदि का उत्तर-पूर्व दिशा में होना एवं वास्तु-विज्ञान के क्षेत्र में इनका महत्त्व व उपयोगिता

वास्तु के क्षेत्र से संबंधित साहित्य जो बाज़ार में उपलब्ध हैं, इनमें मूलरुप से इस बात पर जरुरत से ज़्यादा ज़ोर दिया गया है कि घर के स्नानघरों व प्रसाधन कक्षों तथा शौचालयों को किसी भी स्थिति

Main Door Direction-Saral Vaastu

९. मुख्यद्वार की स्थिति एवं इसकी दिशा का महत्त्व व उपयोगिता

ऐसे लोग जो पहली बार कोई नई संपत्ति खरीदना चाहते हैं या एक निवेश स्वरुप, अपनी जमा-पूँजी को लगाना चाहते हैं, तो ऐसे लोगों द्वारा बिल्डरों / प्रोमोटरों / संपत्ति-दलालों / संपत्ति डेवलपर्स आदि से यह विशेष माँग की जाती है

Puja Room Direction-Saral Vaastu

८. पूजागृह या कक्ष की स्थिति उत्तर – पूर्वी दिशा में उचित या अनुचित!

इस सवाल के जवाब में, जोकि ज़्यादातर वास्तु पंडितें द्वारा चुप्पी साध ली जाती हैं अथवा बात को घुमा-फिरा कर टाल दी जाती हैं, जिसके फलस्वरुप बिना उत्तर दिए हुए यह सवाल एक अनसुलझी पहेली की तरह बनी रहती हैं।

Cycle Of Life-Saral Vaastu

६. जन्म-मृत्यु चक्र का सरल-वास्तु से संबंध

वास्तु एक विज्ञान की तरह, विभिन्न देशें जैसे भारत, चीन, थाईलैण्ड, मलेशिया, सिंगापुर एवं अन्य दक्षिण-पूर्व ऐशियाई देशें में अलग-अलग रुपें में प्रचलित हैं, जैसे पेंगशूई, इत्यादि। वास्तु से संबंधित साहित्य व ज्ञानवर्धक सामग्री भी, एक देश से दूसरे

Main Door Direction-saral Vaastu

५. मुख्यद्वार का उत्तर-पूर्व दिशा मेें होना – वैज्ञानिक दृष्टिकोण व स्पष्टता

वास्तु-शास्त्र जैसे प्रचीन ग्रंथ के शुरुआती पृष्ठोें मेें ही, घर के मुख्य-द्वार की दिशा का वर्णन हैैं, इसे सही अर्थ में समझना बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं।

Saral Vaastu Concept

४. सरल-वास्तु संकल्पना सर्वजन कल्याण के लिए – प्रयुक्त होने की विधि

हमारे भारतीय समाज में, बड़े पैमाने पर आपको ‘अतिविशिष्ठ वास्तु-शास्त्र में पारंगत प्रिसद्ध वास्तु-पंडित’, मिल जाएगें, जो गाँव-गाँव व शहर-शहर घुमकर प्रयः फेरी करने की भाँति,

Saral Vaastu

२. सरल-वास्तु-एक परिचय

सरल शब्द यानि कि समझने व अपनाने लायक सहज सामान्य क्रिया अथवा विशेषता हैैं। इसी प्रकार सरल वास्तु एक कला एवं विज्ञान हैं, जोकि वास्तु-सिद्धांतो को, एक सरल व सहज तरीके से अपनाने का रास्ता दिखलाता है।