home in front of mandir

चित्र मंदिर के बिलकुल सामने घर

अनेक विद्वानों के आधुनिक समय में वास्तु विशेषज्ञों के मत एंव वास्तु संबंधित शोध से सर्वसामान्य अभिप्राय से ऐसा निष्कर्ष निकाला गया है कि, यदि किसी भी व्यक्ति का घर, मंदिर के बिलकुल सामने की ओर या ऐसी जगह स्थित हो जहॉ मंदिर की छाया अकृति, घरों, फ्लेट्स, अपार्टमेन्ट्स आदि पर पडती हो तो यह उन घरों में रहनेवालों के लिए, अशुभ माना जाए वास्तुशास्त्र के अनुसार ऐसा स्वीकार किया गया है कि, जिस जगह पर मंदिर की छाया पड़ती हो उसके आसपास के निवासियों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव जिसकी वजह कभीकभी पैदा करती है घर के मालिक की मृत्यु भी हो सकती है

दक्षिण भारत और पश्चिम भारत के विभिन्न तीर्थस्थानों में हम शिल्पकृत संरचनाओंवाले गगनचंबी मंदिरों और धार्मिक स्थानों को देखें तो यह समझ आता है कि, सामान्य तौर पर मंदिरों की उंचाई, उसके आसपास के क्षेत्रों में स्थित मकानों से कही अधिक होती है उदाहरण के तौर पर, ज़्यादातर किस्सों में, दक्षिण भारत में मंदिरों की औसतन उंचाई ३० फूट से अधिक की होती है ।परिणामस्वरुप, स्वाभविक तौर पर, यदि मंदिर से क्षैतिज या अनुलंब रेखा में कम से कम ३० फूट दूर हो तो छाया पडने का कोई सवाल ही उपस्थित नही ।इसके फलस्वरुप, किसी भी प्रकार की जानेवाली वास्तु दोष पैदा नही होते

मैं वास्तु पंडितों को सवाल पूछना चाहता हूं, जो लोग विजेता के स्वरुप में घोषणा करते हैं कि, किसी भी व्यक्ति को ऐसे घर में नही रहना चाजिये, जहॉ मंदिर की छाया पडती हो, अन्यथा नि:शंक रुप से परिवार के कमानेवाले व्यक्ति की अकाल मृत्यु हो जायेगी यदि एम मध्यम वर्ग का व्यक्ति, लोन और अन्य संसाधनों को प्राप्त करके और जीवनभर की पूंजी का निवेश करके, अपने लिए एक घर खरीदता है और कुछ समय पश्चात जब उसे पता चले कि, उसका घर, मंदिर के आसपास के जगह में स्थित है, तब उसे क्या करना चाजिये ? उसकी जीवनभर की बचत के १५-२० लाख रुपये खर्च करने के बाद या भारी ऋण लेकर हर महीने उसके वेतन में से EMI का भुगतान करता हो,तो उसे अब क्या करना चाहिये ? क्या उस घर को पानी के दाम बेच देना चाहिये ? या क्या उन्हें बाहर से अन्य ऋण प्राप्त करके स्वयं पर अधिक बोझ डालना चाहिये ? समाज में व्याप्त इस प्रकार की अव्यावहारिक अवधारणा की वजह से ऐसे हताश मनुष्य के पास कौनसा विकल्य रहता है ? उसका घर अशुभ माने जाने की वजह से शायद वह घर बेच भी सके ।उस घर को पुन: कोई खरीदेगा नही सरलवास्तु भी मानता है कि, आदर्श तौर पर मंदिर और पूजा के स्थलों के सामने या ऩजदीक घर का निर्माण नही करना चाहिये क्योंकि वह कुछ समस्याएं और वास्तु दोषों को खड़े कर सकता है इस तर्क के पीछे भी एक वैज्ञानिक कारण है

जैसे कि, पहले चर्चा की गई उस अनुसार, हम पूजाउपासना के स्थानों पर जाते है, वह हमें मन की शांति प्रदान करते है। आरती दौरान या शाम की पूजा के समय, वायुमंडल पवित्र अगरबत्तियॉ, लोबान, धूप, पवित्र कपूर, शुद्ध घी के दिये, मोमबत्तियॉ और सरसों या तिल के तेल के दीये प्रगटाने से वातावरण महक से भर जाता है, जिसके साथ झालर, शंख, ढोल, नगाड़ों के नाद की वजह से संवादिता का सर्जन होता है यह सभी तत्व, पवित्र वातावरण के सर्जन में अपना योगदान देते हैं, जहॉ हम शांत मन से ध्यान करते हैं और इस परम सुख का क्षणिक आनंद प्राप्त करने के लिए हम हमारे देवीदेवताओं को याद करते है

यह सभी धार्मिक विधियॉ हरएक धर्मो में देखी जाती है जैसे की ईसाईयों के त्यौहारों के दौरान, बहुत ही बड़े मोमबत्ती के स्टेन्ड पर मोमबत्तीयॉ प्रकाशमान और प्रज्वलि होती देखने को मिलती है और हिंदूओं के त्यौहारों में, तेल से भरे हुए दीये रातभर जगमगाते पाये जाते है और नवरात्री के त्यौहार में तो निरंतर नौ रात्रियों तक अखंड ज्योति प्रज्व]िलत रहती है, हरएक रात्री बाद उसमें तेल डाला जाता है और यह शुभ नौ दिनों दौरान किसी भी समय इस दीये की लौ या ज्वाला बुझती नही चाहिये, इस प्रकार, सभी धार्मिक त्यौहारों और संस्कृति के उनके आवश्यक सिद्धांत होते है भक्तगण जो मन की शांति और सौहार्द प्राप्त करते है, वह अवर्णनीय है मोक्ष या मुक्ति के सिद्धांत के दर्शन भी सकारात्मक ऊर्जाओं का बलपूर्वक उपयोग करके हमारे घरों और कार्यस्थलों के साथसाथ हमारे जीवन में से सदा के लिए नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करती है

यह सभी धार्मिक विधियॉ आसपास के वातावरण में छिपी हुई विभिन्न स्तर की नकारात्मक ऊर्जाओं के स्थान पर हमारी आंतरिक शुद्धि और मन की शांति तथा सौहार्द द्वारा सकारात्मक ऊर्जा की स्थापना सूचित करती है अब एकत्रित हुई सभी प्रकार की

नकारात्मक ऊर्जाओं को सकारात्मक ऊर्जाओं द्वारा बाहर निकाला जाता है, तब यह नकारात्मक ऊर्जा आसपास के घारों में सरलता से प्रवेश करती है ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण घारों में निवास करते परिवार के निर्दोष सदस्य सामूहिक नकारात्मक ऊर्जा के आाढमण के मार्ग के चाहते हुए भी शिकार बन जाते है और अन्य निरंतर प्रकार से ऐसे हमलों के आकस्मिक और अवर्णनीय बिमारियों, कमजोरियों और अन्य प्रकीर्ण आरोग्य समस्याओं के शिकार बनते रहते है, जो परिवार संबंधित सदस्यों की नियमित समय सारिणी में पूर्णरुप से गड़बड़ी पैदा करती है अंत में, परिवार के सदस्यों की मन की आंतरिक शांति और सौहार्द प्रभावित होता है और वह लोग इस बात से संपूर्ण रुप से अनभिज्ञ होते है कि, वह किसी वजह से परेशानी भुगत रहे है जीवन के विशिष्ट लम्हों के बारे में वह निरंतर अंघकार में ही संघर्ष किया जाता है

चित्र चर्च के बिलकुल सामने की दिशा में स्थित घर दर्शाती हुई आकृति

यदि चर्च के नजदीक स्थित घर असरग्रस्त हुआ है, तो तब ऐसे घर में रहनेवाले परिवारों के सदस्यों की समस्याओं की सरल वास्तु सामाग्री का प्रयोग करके नकारात्मक ऊर्जाओं के ऐसे वास्तु दोषों और उसके मूल स्त्रोतों को संपूर्णरुप से मुक्ति दिलाता है इस प्रकार घर को सुखी, संपन्न बनाकर बिमारीयों से संपूर्ण मुक्त कर समद्ध, शांति और सौहार्द सदा के लिए स्थापित करते है

home in front of masjid

चित्र मस्जिद के बिलकुल सामने की दिशा में स्थित घर दर्शाता हुई आकृति

इसी प्रकार से यदि मस्जिद, घर के सामने स्थित हो या घरों के बिलकुल पास के जगह में दरगाह या पवित्र पीर का मकबरा स्थित हो तो उस स्थान से ऩजदीक रहनेवाले लोगों के मन में शांति और सौहार्द की कमी का सर्जन हो सकता है और उनके घरों और घर में रहनेवाले सभी सदस्यों के जीवन पर दुप्रभाव पड सकता है

घर में रहनेवाले निवासियों और उनकी मानसिक स्वस्थता सुरक्षित करने दृष्टिकोण से उस घर के परिवार के सदस्यों के संबंधों के बीच अनावश्यक झगड़े और मनमुटाव जैसी समस्याएं उत्पन्न होती है, जो एक दूसरे से दूर करती है तत्पश्चात, इस प्रकार की समस्याओं को निपटाने के लिए घर के मालिक के पास, इस घर से बाहर निकलने या तो उन्हें बेचकर ही ऐसी समस्याओं से छुटकारा पाने का एकमात्र विकल्प रहता है इस प्रकार के संबंधित घरों में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़, नवीकरण या परिवर्तन किये बगैर ही सरल वास्तु के सरल वैज्ञानिक सिद्धांतों का लागू करके समाधान प्राप्त किया जाता है

इस प्रकार सरल वास्तु का सही समय मे उपयोग कर और उनकी योजनाओं और समाधानों के सरल कार्यान्वयन के परिणामस्रुप घर मे परिवर्तन करने या बेच देने कीसभी अटकलों का अंत होता है और घारें का कल्याण होता है

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