पुस्तिका के बारे में

इस पुस्तिका के माध्यम से पहले से ही पीड़ित आम लोगों के लिए राहत मिल जाती है जो स्वयंघोषित वास्तु विद्वानोंद्वारा, दुर्भाग्यवश से कभी भी प्राप्त नहीं हुई ऐसी अति प्रतिक्षित व अपेक्षित समृध्दी तथा जीवन में अधिकतर धन मिलने हेतू वास्तु के सुधार तथा पुर्ननिर्माण कार्यान्वयन के नाम पर दिए गए सुझावों की वजह से अनुमान से ज्यादा खर्च करने से बहुत ज्यादा पीड़ित हो चुके हैं।

गुरूजी का लक्ष्य है कि ` प्रताड़ित या सताए हुए व्यक्तियों ‘ के पास पहुंचे ताकि इस तरह से उनको सरल वास्तु मानदंडो की तरफ किया जा सकता है।

`न कोई संरचनात्मक बदल, न कोई प्रमुख परिवर्तन और न कोई नवनिर्माण’ यह हमारा बेजोड विक्रय का केंद्रबिंदू ( U.S.P. ) है। मैं अपने प्रयत्नों को तब तक सार्थक समझूँगा अगर मैं लोगों के उदास जीवन में मामूली परिवर्तन करने में सक्षम बनूँ।

Vaastu Shastra

१. वास्तु-शास्त्र – एक प्रस्तावना व परिचय

वास्तु एक बहुत ही चर्चित तथा उपयोगी विज्ञान हैैं, जो संपूर्ण भारतवर्ष मेें, वैदिक काल से ही प्रचलित रहा है तथा इसका प्रमाण हमारे ऐतिहासिक इमारतों एवं राष्ट्रीय धरोहरोें मेें, हमेें आज भी दिखाई देते हैैं।

Saral Vaastu

२. सरल-वास्तु-एक परिचय

सरल शब्द यानि कि समझने व अपनाने लायक सहज सामान्य क्रिया अथवा विशेषता हैैं। इसी प्रकार सरल वास्तु एक कला एवं विज्ञान हैं, जोकि वास्तु-सिद्धांतो को, एक सरल व सहज तरीके से अपनाने का रास्ता दिखलाता है।

vastu compass-Saral Vaastu

३. सरल-वास्तुशास्त्र – एक वैज्ञानिक विश्लेषण

शुरुआत में ही, यहाँ पर यह बात स्पष्ट कर देनी चाहिए कि वास्तु न तो कोई अंधविश्वास से भरा प्राचीन विचार है और नहीं कोई अस्पष्ट अध्ययन द्वारा शोधित, कोई पढ़ने लायक बृहद शास्त्र है। यह कोई रिती रिवाज पर आधारित

Saral Vaastu Concept

४. सरल-वास्तु संकल्पना सर्वजन कल्याण के लिए – प्रयुक्त होने की विधि

हमारे भारतीय समाज में, बड़े पैमाने पर आपको ‘अतिविशिष्ठ वास्तु-शास्त्र में पारंगत प्रिसद्ध वास्तु-पंडित’, मिल जाएगें, जो गाँव-गाँव व शहर-शहर घुमकर प्रयः फेरी करने की भाँति,

Main Door Direction-saral Vaastu

५. मुख्यद्वार का उत्तर-पूर्व दिशा मेें होना – वैज्ञानिक दृष्टिकोण व स्पष्टता

वास्तु-शास्त्र जैसे प्रचीन ग्रंथ के शुरुआती पृष्ठोें मेें ही, घर के मुख्य-द्वार की दिशा का वर्णन हैैं, इसे सही अर्थ में समझना बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं।

Cycle Of Life-Saral Vaastu

६. जन्म-मृत्यु चक्र का सरल-वास्तु से संबंध

वास्तु एक विज्ञान की तरह, विभिन्न देशें जैसे भारत, चीन, थाईलैण्ड, मलेशिया, सिंगापुर एवं अन्य दक्षिण-पूर्व ऐशियाई देशें में अलग-अलग रुपें में प्रचलित हैं, जैसे पेंगशूई, इत्यादि। वास्तु से संबंधित साहित्य व ज्ञानवर्धक सामग्री भी, एक देश से दूसरे

vastu for rented home-Saral Vaastu

७. वास्तुशास्त्र का लाभ मकानमालिक या किरायेदार अथवा दोनो के लए

वास्तु के विषय मे एक बहुत ही सर्व सामन्य प्रश्न पुछा जाता है, जोकी आपकी जज्ञासा को जागृत करता है, में उस पर ज्यादा ध्यान केन्द्रित करना चाहाता हूं। कोई भी व्यक्ति, जोकि किराये के मकान में रहता हो अथवा किराये

Puja Room Direction-Saral Vaastu

८. पूजागृह या कक्ष की स्थिति उत्तर – पूर्वी दिशा में उचित या अनुचित!

इस सवाल के जवाब में, जोकि ज़्यादातर वास्तु पंडितें द्वारा चुप्पी साध ली जाती हैं अथवा बात को घुमा-फिरा कर टाल दी जाती हैं, जिसके फलस्वरुप बिना उत्तर दिए हुए यह सवाल एक अनसुलझी पहेली की तरह बनी रहती हैं।

Main Door Direction-Saral Vaastu

९. मुख्यद्वार की स्थिति एवं इसकी दिशा का महत्त्व व उपयोगिता

ऐसे लोग जो पहली बार कोई नई संपत्ति खरीदना चाहते हैं या एक निवेश स्वरुप, अपनी जमा-पूँजी को लगाना चाहते हैं, तो ऐसे लोगों द्वारा बिल्डरों / प्रोमोटरों / संपत्ति-दलालों / संपत्ति डेवलपर्स आदि से यह विशेष माँग की जाती है

Toilets, Bathrooms In The North-East Direction-Saral Vaastu

१०. स्नानघर व प्रसाधन कक्ष तथा शौचालय आदि का उत्तर-पूर्व दिशा में होना एवं वास्तु-विज्ञान के क्षेत्र में इनका महत्त्व व उपयोगिता

वास्तु के क्षेत्र से संबंधित साहित्य जो बाज़ार में उपलब्ध हैं, इनमें मूलरुप से इस बात पर जरुरत से ज़्यादा ज़ोर दिया गया है कि घर के स्नानघरों व प्रसाधन कक्षों तथा शौचालयों को किसी भी स्थिति

Toilets, Outside The Main House-Saral Vaastu

११. प्राचीन भवन व स्थापत्य कला का शौचालय का स्थान दूर क्यों होता है?

प्राचीन काल में हमारे पूर्वजों द्वारा ऐसे ही घरों में निवास किया जाता था, जहाँ पर शौचालय घर के बाहर स्थित होते थे। यह व्यवस्था इसलिए होती थी जिससे कि शौचालयों से निकलनेवाली नकारात्मक शक्तिओं से घर में रहनेवाले सदस्यों को

Right Location For Kitchen-Saral Vaastu

१२. रसोई व रसोईघर के लिए सही एवं उपयुक्त जगह – कैसी हो!

घरों में ‘रसोईघर’ का हमेशा से ही एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया हैं। पुराने जमाने के घरों में बड़े-बड़े रसोईघर बनवाने का प्रावधान आज भी प्राचीन वास्तु-अवशेषों के द्वारा नज़र आता हैं।

South-West Direction

१४. दक्षिण – पश्चिम ( नैऋत्य ) दिशा – किस प्रकार से परिवार के मुखिया के लिए अनुकूल ( शुभ ) है ?

आधुनिक युग में भवन निर्माण के दौरान उपयोगी वास्तु के अनुसार घर के मुखिया का शयनकक्ष, घर के दक्षिण -पश्चिम कोने में स्थित होना चाहिये. किंतु यदि ऐसा संभव न हो तब शयनकक्ष का नवीकरण या उसमें परिवर्तन करने की

Scientific Analysis Of The North East Direction-Saral Vaastu

१३. उत्तरी-पूर्व दिशा का वैज्ञानिक विश्लेषण

भारतीय प्राचीन ग्रंथ वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि हम घर को बनवाते समय या उसमे सामान व्यवस्थित करते समय यदि वास्तु के नियमों का समावेश करे तो सकारात्मक ऊर्जा को आकषृ कर घर परिवार के सदस्यों को और भी अधिक ऊर्जावान और सेहतमंद बनाया जा सकता है।

Borewell Direction

१५. उत्तर – पूर्व ( ईशान) दिशा में बोरवेल का न होना -उसके परिणाम

बोरवेल की उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा के अलावा अन्य किसी भी दिशा में उसकी उपस्थिति, वह चर्चा करने और समझने के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण मुद्दा है.माना जाता है कि यदि उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा घर के सामने आती हो

Main Gate Of The House In North East

१६. उत्तर-पूर्व दिशा में घर के प्रमुख द्वार का महत्त्व और प्रासंगिकता

वास्तुशास्त्र के विषय पर उपलब्ध विभिन्न पुस्तकों और साहित्य द्वारा यथार्थ रु से प्रचारित हुए और स्थापित मानकों और ऱुढ़िओं की वजह से लोग उनके घर का मुख्य प्रवेश द्वार उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा की ओर रखने के लिए प्राथमिकता देते हैं

House Facing ‘L’ Junction & ‘T’ Junction

१७. घर के सामने ‘L’ आकार का मार्ग या घर के सामने ‘T’ आकार का मार्ग संभावना और प्रभाव

ऐसा कहा जाता है और मैं भी वास्तुशास्त्र की किताबों के साथ समहत हूँ कि, घर ‘L’ और ‘T’ आकार के मार्ग पर स्थित नही होने चाहिये या अलग शब्दों में कहा जाये तो ‘L’ और ‘T’ आकार के मार्ग, घर के सामने की दिशा में नही होने चाहिये।

Mandir

१८. पुजा या किसी धार्मिक स्थान के सामने की ओर स्थित घर में निवास करने से शांतिपूर्ण जीवन – वास्तविक्ता या कल्पित गाथा ?

अनेक विद्वानों के आधुनिक समय में वास्तु विशेषज्ञों के मत एंव वास्तु संबंधित शोध से सर्वसामान्य अभिप्राय से ऐसा निष्कर्ष निकाला गया है कि, यदि किसी भी व्यक्ति का घर, मंदिर के

Three Doors In a Straight Line

१९. किसी भी घर में, तीन दरवाजों की समांतर रेखा में उपस्थिति का दुष्प्रभाव

ऊपर दिये गे शीर्षक संबंधित समस्या के बारे में वास्तुशास्त्र की बहुत -सी किताबों में विभिन्न संदर्भ दिये गये और बहुत सारे वास्तु पंडितों ने भी उनके लेखों में, इस जटिल परिस्थिति के विषय में भी कहा है

Saral Vaastu for Women

२०. महिलाओं के लिए सरल वास्तु – शरीर के बढ़ते वजन को कैसे रोका जाए और किस प्रकार से संतुलित वजन बनाए रखा जाए

वर्तमान समय में सभी लोग अपने शरीर को लेकर चिंतित रहते हैं, खास करके महिलाएं जो सेहतमंद तथा सुंदर दिखना चाहती है । मेरे दिए गए प्रवचनों और सेमिनारों के श्रोतागण में सामान्य तौर

child with books

२१. छात्रों के उज्ज्वल शैक्षणिक भविष्य के लिए सरल वास्तु और इसका योगदान

पढ़ने और सोने की दिशा आपकी एकाग्रता और सोचने की क्षमता को बढ़ाता है । वास्तु निर्देशो का अनुसरण करने से आज्ञाचक्र ठीक सक्रिय हो जाता है जिससे उनमे नई उमंग और एकाग्रता उत्पन्न होती है ।

married couple

२२. स्त्री के लग्नजीवन का सुवर्ण प्रारंभ और सरल वास्तु के साथ संयोजकता

हमारे भारतीय रिवाज और परंपराओं को ज्यादातर लोगों द्वारा स्वीकार कर संपन्न किया जाता है। विवाह के गठबंधन के लिए जब वर और उसके परिवार के सदस्यों के सामने की दिशा में प्रथम बार वधू(कन्या)को प्रस्तुत करते समय

२४. सरल वास्तु में मकान या संरचना का आकार और उसका महत्व

सरल वास्तु में मकान या संरचना के आकार का अत्याधिक महत्व है । बहुत ही महत्वपूर्ण तौर पर, ऐसी सलाह दी जाती है कि, किसी भी परिस्थिति के अंतर्गत, मकान या संरचना का निमार्ण, यहॉ नीचे दिए आकारों के स्वरुपों से युक्त नही होनी चाहिए ।

Suggestions & Additional Information On Vaastu

२३. सरल वास्तु द्वारा वास्तु संबंधित अधिक सुझाव एवं अतिरिक्त जानकारी

वास्तुशास्त्र के सिद्धांतो के अनुसार, किसी भी परिस्थिति के अंतगर्त, घर या ऐसी किसी भी स्थान के मध्य में सीढ़ी का निर्माण नही करना चाहिए। इसके अलावा, सीढ़ीयो की दिशा पूर्व से पश्चिम या दक्षिण से उत्तर की ओर होना चाहिए ।

२५. प्राचिन काल से भारत मे वास्तु विज्ञान का महत्व एक अध्ययन

भारत के सभी राज्यों में से विविध भारतीय भाषाओं और लिपिओं में उपलब्ध वास्तु साहित्य पर मैंने संधोधन किया है । भारत के सभी राज्यों में से वास्तु विशेषज्ञों ने अपनी अनेक किताबो और हस्तलिखित पुस्तकों में यह उल्लेख किया है

२६. भारत का नक्शा (भौतिक और राजकीय )

ऊपर दर्शाये हुए भारत के नक्शे (भौतिक और राजकीय )अनुसार, देश की कार्यकारी, कानूनी और न्यायतंत्र की सरकारी संस्थानों के प्रमुख कार्य संसद में से होते है, जिन्हें हम संसद भवन के नाम से जानते हैं, जो दिल्ली मे स्थित है ।नई दिल्ली, केंन्द्र सरकार है और इसे देश का हद्य भी कहा जाता है

२७. घर के ऊपर, पर्यावरण के बाहर दोषों (अशुद्धियों) का असर और इस संदर्भ में सरल वास्तु का महत्त्व

ऊपर की आकृति में दर्शाये अनुसार, यदि कोई भवन या मकान इस प्रकार के टेढ़े रास्ते के सामने स्थिर हो तब छोटी या बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है या दुर्भाग्यवश

२८. सरल वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार, प्रकाश का पर्व दीपावली का उत्सव

भारत के उत्सव, हमेशा किसी न किसी धार्मिक संलग्नता या धार्मिक अनुष्ठानों के उत्सवों से साथ जुड़े हुए है । हरएक त्यौहार,विशिष्ट धार्मिक प्रयोजन से युक्त होता है, जैसे कि, होली की भक्ति, भगवान विष्णु और उनके नरसिंह अवतार की पूजा

२९. नये घर और कार्यलय / संस्था के लिए : सरल वास्तु द्वारा कार्यन्वित नक्शे की रुपरेखा

इस किताब के गहन अध्ययन से यह स्पष्ट है कि, सरल वास्तु, ने अपने सरल और वैज्ञानिक समाधानों द्वारा घर, कोर्पोरेट ऑफिस जैसी आधुनिक सरंचनात्मक संस्था को उसकी सेवा प्रदान करने का क्रांति बना चुका है ।