सहस्र चक्र का मतलब है हजारो पंखुड़ियाँवाला कमल का फूल और इसे 7 वाँ चक्र ब्रह्मरंध्र ( भगवान का द्वार ), शून्य, निरलंबापूरी और हजारों किरणों का केंद्र ( जैसे की वह सूरज जैसे चमकता होता है ) तथा शीर्ष चक्र ( क्राऊन चक्र ) भी कहा जाता है । सहस्र चक्र दुनिया तथा स्वयं की पूरी जागरूकता के साथ व्यक्ति की बुध्दि और परमात्मा से आध्यात्मिक मिलाप का प्रतिनिधित्व करता है । इसे कोई विशिष्ट रंग से संबंधित नहीं है, यह एक निर्मल शुध्द प्रकाश है जो बाकी रंगों को समा लेता है ।

सहस्र चक्र का स्थान

सहस्र चक्र सिर के उपर, चार उँगलियाँ जितनी चौड़ाई से उपर शीर्ष स्थान में तथा कानों के बीच की रेखा पर स्थित हैं । यह मुकुट जैसा स्थित होता है जो उपर की तरफ से किरणों को फैलाता है और इसलिए इसे मुकुट चक्र अथवा शीर्ष चक्र कहा जाता है । इस चक्र के स्थान के अनुसार इसका सहसंबंध प्रथम चक्र या मूल चक्र के साथ होता है जो चक्र के चार्ट में दोनों भी अंतिम छोर पर स्थित हैं ।

सहस्र चक्र के साथ जुड़े हुए अवयव तथा बीमारियाँ -

सहस्र चक्र मुख्य रूप से मस्तिष्क तथा त्वचा के साथ जुड़ा हुआ है लेकिन यह आँखे, कान, शीर्ष ग्रंथी ( पिनिअल ग्लॅण्ड – जो आवश्यक हार्मोन्स स्रावित करती है ) और मांसपेशीयों तथा अस्थी प्रणाली को भी प्रभावित करता है ।

अवरूध्द सहस्र चक्र की वजह से मानसिक तथा भावनिक मामलें जैसे सिर दर्द, वृध्दावस्था, उदासी, मनोभ्रंश तथा तंत्रिका ( न्यूरोलॉजिकल ) संबंधी समस्याएँ आती हैं । अन्य संबंधित बीमारियों में मल्टिपल स्क्लेरोसिस ( मस्तिष्क और मेरूरज्जू की विकृति ), अल्जाइमर, पक्षाघात, पार्किन्संस रोग, मिर्गी आदि शामील हैं ।

अवरूध्द तथा असंतुलित सहस्र चक्र से उत्पन्न होनेवाली समस्याएँ -
  • अति सक्रिय सहस्र चक्र –
    जब यह चक्र अति सक्रिय अथवा अति क्रियाशील हो जाता है तब व्यक्ति को सनकी विचार आते हैं तथा वह / वह अतीत में जीना चालू करते हैं और भविष्य की चिंता करते हैं । अति सक्रिय सहस्र चक्र के लोग आध्यात्मिकता के लिए जादा ही आसक्त हो जाते हैं जिससे व्यक्ति अपनी आवश्यक कर्तव्यों की उपेक्षा करता है । अति सक्रिय सहस्र चक्र से मन में स्वार्थी विचार आते हैं परिणामस्वरूप नैतिकता तथा आचार-विचारों में कमी होती है । यह ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यह लोग सर्वोच्च शक्ति से मार्गदर्शन का अनुभव करने में असमर्थ होते हैं तथा अपने आपको इसके लिए अपात्र समझते हैं ।
  • असामान्य रूप से सक्रिय सहस्र चक्र –
    जो व्यक्ति का सहस्र चक्र संतुलित होता है उसका व्यक्तित्व आकर्षक होता है तथा उसे आंतरिक शांती प्राप्त होती है । वह या वह ( स्री ) लगातार अपनी आत्म जागरूकता को ज्ञान से जुड़े हुए विश्वास के साथ बदलकर विकसित करते हैं ।
संतुलित सहस्र चक्र के लाभ -

जो व्यक्ति का सहस्र चक्र संतुलित होता है उसका व्यक्तित्व आकर्षक होता है तथा उसे आंतरिक शांती प्राप्त होती है । वह या वह ( स्री ) लगातार अपनी आत्म जागरूकता को ज्ञान से जुड़े हुए विश्वास के साथ बदलकर विकसित करते हैं ।

सहस्र चक्र को खोलना -
  • चक्र को संतुलित करने के उद्देश्य से ध्यान करें तथा सिर के शीर्ष पर ध्यान केंद्रित करें । बैंगनी रंग की कल्पना करें और ब्रम्हांडीय शक्ति से नाता जुड़ रहा है ऐसे महसूस करो । इस चक्र को खोलने का सबसे आसान तरीका है कि कृतज्ञता व्यक्त करना और इसलिए व्यक्ति ने ध्यान करते समय ब्रम्हांड का धन्यवाद करें ।
  • शवासन ( या मृत शरीर की स्थिति ) और पद्मासन ( या कमल की स्थिति ) यह योगा में दो मुद्राएँ है जिससे 7 वा चक्र खुल जाता है । शीर्षासन या सर के बल खड़े होने से मस्तिष्क में खून का प्रवाह बढ़ जाता है और इससे चक्र खुल जाता है ।
  • घर में सरल वास्तु तथा दिशाओं के सिध्दांतो का अनुसरण करना यह चक्र को खोलने के लिए महत्त्वपूर्ण है ।
  • चक्र को खोलने के लिए उपवास तथा डिटॉक्सिफिकेशन की सिफारिश भी की जाती है । व्यक्ति ने हल्का आहार लेना चाहिए जिसमें बैंगनी रंग के फल और सब्जियाँ अथवा दोनों भी शामिल हो