खुशी का रास्ता

गुरुजी एक प्रबुद्ध व्यक्तित्व के धनी व दैवीय आत्मा हैं। उनके साथ जुड़कर आप अपने “सुखी जीवन” की शुरुआत कर सकते हैं। हर व्यक्ति की जीवन यात्रा अद्वितीय होती है और बाधाएं हर किसी के जीवन का एक हिस्सा होती हैं। गुरुजी ने लाखों लोगों को इन्हीं बाधाओं का सामना करने व खुशहाल जीवन जीने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया है।

गुरुजी की शिक्षाओं से अब तक 50 लाख से अधिक अनुयायियों ने 7 – 180 दिनों के भीतर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव किया है। गुरुजी के मार्गदर्शन द्वारा आप सुखी जीवन के अनूठे मार्ग पर चल सकते हैं।

युवा गुरुजी

डॉ. श्री चंद्रशेखर गुरुजी का जन्म कर्नाटक के बगलकोट जिले में स्वर्गीय श्री विरुपाक्षप्पा और श्रीमती नीलम अंगड़ी के यहाँ हुआ था। बचपन से ही उनका झुकाव राष्ट्र के लिए अपनी सेवाएं देकर देश के लिए कुछ अलग करने की ओर था। और इसका प्रारंभ उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती समय से ही कर दिया था।

गुरुजी का ध्येय बचपन से ही राष्ट्र को अपनी सेवाएं देने का था। अतः इसी कड़ी में 16 वर्ष की कम आयु से ही वो भारतीय सेना में शामिल हो कर देश के लिए अपना जीवन समर्पित करना चाहते थे। लेकिन आवश्यक मानदंडों को पूरा नही कर पाने के कारण उनका चयन सेना में नहीं हो पाया। यहीं से उनके जीवन मे बदलाव आया। उनके जीवन का उद्देश्य “मानव समाज की सेवा” पहले से निर्धारित था। इसलिए सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद वर्ष 1989 में वो मुंबई आ गए।

सफल व्यवसायी

कुछ वर्षो तक एक निर्माण (कन्सट्रक्शन) कंपनी के साथ काम करने के बाद, गुरुजी ने अपनी कंपनी शुरूआत की। उनकी कंपनी ने 1999 की शुरुआत में बहुत लाभ कमाया और अच्छी तरक़्क़ी की। उनका व्यवसाय अच्छा चल रहा था। लेकिन एक समय ऐसा आया जब उन्हें व्यवसाय में अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा और इसे नैतिक तरीके से चलाने के बावजूद भी भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा। वह इस सोच में पड़ गए कि इतनी ईमानदारी से काम करने के बाद भी नुकसान की क्या वजह रही। उन्हें धोखा क्यों मिला, जब उन्होंने अपने जीवन में किसी को धोखा नहीं दिया।

गुरुजी की दिव्य जागृति

गुरूजी ने बचपन से ही अपने आसपास लोगों को उनके जीवन मे आने वाली अनेक चुनोतियों से सामना करते हुए देखा था। वह एक बार मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल गए और उन बच्चों को देख कर व्याकुल हो गए जो कैंसर से पीड़ित थे। उनके मन में ये विचार आया कि इन बच्चों को इतना दर्द सहन करना पड़ता है तो इन्हें इस दुनिया मे लाया ही क्यों गया हैं।

उसी समय उन्हें अपने व्यवसाय में चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इस अवधि के दौरान उन्हें एक कंपास और एक घर की योजना के नक्शे के बार-बार सपने आने लगे। उन्होंने सोचा कि वह बार-बार यह सपना क्यों देख रहे है। वर्ष 2000 में एक दिव्य जागृति ने उन पर इस बात का प्रभाव डाला और उन्हें इस बात से परिचित कराया। उन्हें ज्ञान हुआ कि जीवन में आने वाली चुनौतियों का मूल कारण हमारे अंदर और हमारे आस-पास के वातावरण में कॉस्मिक ऊर्जा की अशुद्धता और असंतुलन है। हमें इसके लिए किसी और को दोष नहीं देना चाहिए।

मानवीय

मनवा अभिवृद्धि अभियान: गुरुजी ने शिक्षा, करियर, विवाह, व्यवसाय, धन और स्वास्थ्य जैसे सभी विषयों को अपने वास्तु ज्ञान में सम्मिलित किया। इन्हीं के द्वारा उन्होंने अपने 50 लाख अनुयायियों को “सुखी जीवन का रास्ता” दिखाया है।

बड़े पैमाने पर गाँव गोद लेने का कार्यक्रम: इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण समुदायों के उत्थान और मानव अभिवृद्धि को प्राप्त करना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत गोडाची, बेलागवी जिला, कर्नाटक गुरुजी द्वार अपनाया गया पहला गाँव हैं। गुरुजी के अनुसार, हम ग्राम अभिवृद्धि या ग्रामीण विकास का लाभ तब ही उठा सकते हैं, जब समुदाय या समाज मानव अभिवृद्धि के लिए सक्षम हो।

ग्रामीण क्षेत्रों में वंचितों के लिए स्कूल: ये गुरुजी द्वारा चलाया जाने वाला अद्भुत कार्यक्रम है। ये बच्चों को शिक्षा के लिए एक अनोखा व अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। इन स्कूल या विद्यालयों का उद्देश्य बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के साथ ही उन्हें शैक्षणिक, मानसिक, सामाजिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना हैं।

कन्नड़ में भारत का पहला क्षेत्रीय इंफोटेनमेंट चैनल: इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य सूचनात्मक और सकारात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से भारत भर में कला, संस्कृति, परंपरा के प्रति लोगों को शिक्षित करना है।

प्रगतिशील किसानों के लिए पुरस्कार: प्रगतिशील किसानों को पहचानने और उन्हें सम्मानित करने के लिए एक पुरस्कार कार्यक्रम शुरू किया गया है।

सामुहिक विवाह: इसका उद्देश्य ज़रूरतमंद जोड़ों के लिए सामूहिक विवाह का आयोजन करवाना है ताकि वे गरिमापूर्ण तरीके से शादी करने के साथ ही खुशहाल जीवन जी सकें।

दर्शन

डॉ. श्री चंद्रशेखर गुरुजी ने हमेशा वसुधैव कुटुम्बकम के मूल दर्शन में विश्वास किया है, जिसका अर्थ है कि संपूर्ण ब्रह्मांड एक परिवार है।

उनका दृढ़ विश्वास है कि अधिकांशतः व्यक्ति अपना जीवन सिर्फ “मैं और मेरा परिवार ” पर केंद्रित करते हैं। कुछ लोग “मैं, मेरा परिवार और मेरा समाज’ के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी समझते हैं लेकिन केवल मुट्ठी भर लोग ही “मैं, मेरा परिवार, मेरा समाज और मेरा राष्ट्र ” के प्रति अपने कर्तव्यों पर ज़ोर देते हैं। डॉ. श्री चंद्रशेखर गुरुजी के अनुसार , प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम “मैं, मेरा परिवार और मेरा समाज ” की भावना पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इससे राष्ट्र का निर्माण स्वतः ही हो जाएगा व लोग अपने जीवन मे परम सुख को प्राप्त कर सकेंगे।