अनाहत चक्र ( मतलब अजेय अथवा खुला ) या हृदय चक्र यह मानवी शरीर का 4 था मुख्य चक्र होता है । दूसरों के साथ आपस में बाँटे हुए गहरे रिश्ते और बिना शर्त प्यार की स्थिति को नियंत्रित करता है । चूँकि प्यार एक उपचारात्मक शक्ति है, यह चक्र भी चिकित्सा का केंद्र माना जाता है । परोपकारिता, खुद के लिए तथा दूसरों के लिए प्यार, क्षमा, अनुकम्पा तथा सुख यह संतुलित अथवा खुले अनाहत चक्र की गहरी विशेषताएँ है । इसमें इच्छाओं को पूरा करने की शक्ति है और अगर चक्र को सही प्रकार से संतुलित और शुध्द है तो मनोकामनाएँ जल्दी से पूरी हो जाती है ।

यह चक्र कमल के साथ 12 पंखुडियाँ ( दिल की बारह दिव्य गुणों को सूचित करता है ) के साथ प्रतीकात्मक दर्शाया जाता है । इसका मंत्र ` यम ‘ है तथा रंग हरा है ।

अनाहत चक्र का स्थान

छाती के मध्य में ( या दो स्तनों के बीच में ) यह चक्र स्थित होता है ।

अनाहत चक्र के साथ जुड़े हुए अवयव तथा बीमारियाँ -

यह चक्र मुख्य रूप से दिल तथा फेफड़ों के कार्य को नियंत्रित करता है । यह त्वचा, भूजाएँ, रक्ताभिसरण प्रणाली, प्रतिरक्षा प्रणाली और बाल्य ग्रन्थि ( थायमस ग्लॅण्ड ) को नियंत्रित करता है ।

दिल का जोरसे धडकना, रूक जाना तथा उच्च / निम्न रक्तचाप जैसे हृदय से संबंधित विकार और फेफड़ों का तथा स्तन कैन्सर यह बंद अनाहत चक्र की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति है । एलर्जीज्, बुखार, अस्थमा, क्षय ( टीबी ) और छाती में रक्त संचय होना यह कुछ और अनाहत चक्र के काम न करने से होनेवाली बीमारियाँ है ।

अनाहत चक्र के बंद होने से या असंतुलन से होनेवाली समस्याएँ -
  • अति सक्रिय अनाहत चक्र –
    जब यह चक्र अति सक्रिय होता है तब व्यक्ति भावनाओं ( जैसे गुस्सा, उदासी, ईर्ष्या, खुशी आदि सहित ) से बेकाबू होने को अनुभव करता है । प्यार सशर्त हो जाता है और पाने या हावी होने की तीव्र इच्छा को पहुँचता है । रिश्ता कब आखरी मोड़ पर पहुँच गया इसे समझने में लोग असमर्थ हो जाते हैं या वो अपमानजनक संबंध के साथ रहने लगते हैं।
  • असामान्य रूप से सक्रिय अनाहत चक्र –
    जब यह चक्र असमान्य रूप से सक्रिय तथा पूर्ण निष्क्रिय हो जाता है तब व्यक्ति अपने अंदर प्यार को आने से रोक देता है परिणामस्वरूप आत्म घृणा और दया तथा अनुपयुक्तता की भावनाओं को महसूस करता है । लोग हर चीज के बारे में अनुमान बनाते हैं ( आलोचनात्मक हो जाते हैं ) और अपनी असफताओं के लिए दूसरों को दोष देतें हैं ।
संतुलित अनाहत चक्र के फायदे -

संतुलित अनाहत चक्र से व्यक्ति बिनशर्त प्यार करता है और वास्तविक करूणा तथा आत्म स्वीकृति दिखाता है जो उन्हें दूसरों को प्यार करने तथा स्वीकार करने की सक्षम बनाता है । ऐसे लोग स्वभाव से परोपकारी होते हैं । निष्कपट तथा शुध्द अनाहत चक्र से व्यक्ति वास्तव में केवल कामक्रीडा के माध्यम से आध्यात्मिकता का अनुभव करता है ।

अनाहत चक्र को खोलना -
  • किसी को बिनशर्त प्यार करना यह हृदय चक्र को खोलने की प्राथमिक पध्दति है । किसीको प्यार करने से और उसकी प्रशंसा करने से ही व्यक्ति दूसरों को प्यार कर सकते हैं ।
  • किसी विशिष्ट चक्र की ध्यान धारणा करने से उस चक्र को खोलने का सबसे अच्छा तरीका है । योग की गरूडासन ( या गरूड की मुद्रा में ) अथवा गोमुखासन ( या गाय की मुद्रा में ) की स्थिति में बैठने से अनाहत चक्र खुल जाता है ।
  • ध्यान धारणा के वक्त, हृदय के पास हरे रंग की कल्पना करो । हरे रंग के कपडे पहन के अथवा हरे रंग के कमरे में बैठकर भी ध्यान किया जा सकता है । हरे पौधों और पेड़ों के आसपास बैठकर ध्यान करना एक और विकल्प है ।
  • चौथे चक्र के लिए पैरों में बिना कुछ पहने हुए या हरी घास पर लेटना अच्छा होता है ।
  • रत्नों को पहने से अथवा हरे रंग के क्रिस्टल को रखने से चक्र का संतुलन होता है । जेड, पेरिडोट, पन्ना, हरा जैस्पर ( सूर्यकान्त मणि ), रोझ क्वार्ट्ज आदि रत्न व क्रिस्टल्स इसमें शामिल है ।
  • घर के वास्तु अनुरूप कमरे में व्यक्ति की अनुकूल दिशा में सोने से इस चक्र जागृत हो जाता है ।
  • सुगंध चिकित्सा में नालगिरी, देवदार की लकड़ी, पचौली आदि आवश्यक तेलों को लगाना ( अच्छा हो कि ध्यान करते समय लगाएँ ) इसमें शामिल है ।
  • हृदय चक्र के लिए हरा सेब, हरी सब्जियाँ, नांबू, ककड़ी आदि खाद्य वस्तु शामिल हैं ।